TTN डेस्क
सैन फ्रांसिस्को की कंपनी ने पारे को पीली धातु में बदला
सैन फ्रांसिस्को स्थित न्यूक्लियर फ्यूजन स्टार्टअप मैराथन फ्यूजन ने हाल ही में एक बड़ा दावा किया है। कंपनी का कहना है कि उसने न्यूक्लियर फ्यूजन तकनीक से निकलने वाले न्यूट्रॉनों की मदद से पारे (मर्करी) को स्थिर और असली सोने में बदल दिया है। यह दावा आर्थिक टाइम्स सहित कई मीडिया रिपोर्ट्स में छपा है।
0 क्या है पूरा मामला?
मैराथन फ्यूजन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके बताया कि पिछले महीने उसने “हाई-रेट अल्केमी” का प्रदर्शन किया। कंपनी के अनुसार, यह प्रक्रिया CERN की 2025 की रिकॉर्ड से 10 गुना तेज है। प्रक्रिया में मर्करी-198 आइसोटोप पर फ्यूजन से पैदा हुए न्यूट्रॉन दागे जाते हैं। इससे मर्करी-197 बनता है, जो कुछ दिनों में स्थिर गोल्ड-197 (सोना) में बदल जाता है।
कंपनी ने बताया कि उसने गामा-रे स्पेक्ट्रा भी जारी किया है, जिसमें मर्करी-197 और गोल्ड-197 के संकेत दिखे। साथ ही, कंपनी ने जिंक से कैंसर ट्रीटमेंट वाले कॉपर आइसोटोप भी बनाने का दावा किया है।
0 कितना सोना बना?
कंपनी ने प्रयोग में कितना सोना बनाया, इसकी सटीक मात्रा या लागत अभी नहीं बताई है। CERN के प्रयोग में चार साल में सिर्फ 29 पिकोग्राम (बहुत ही सूक्ष्म मात्रा) सोना बना था। मैराथन का दावा 10 गुना तेज होने के बावजूद भी मात्रा अभी बहुत कम है।
कंपनी के 2025 के एक रिसर्च पेपर में अनुमान लगाया गया था कि एक गीगावाट क्षमता वाले फ्यूजन प्लांट से सालाना करीब दो टन सोना बनाया जा सकता है। लेकिन यह सिर्फ अनुमान है। अभी कंपनी का मौजूदा रिएक्टर बहुत छोटी क्षमता (लगभग 1 किलोवाट) का है।
0 क्या सोने की कीमतें गिरेंगी?
इस खबर के बाद निवेशकों और सराफा बाजार में चर्चा तेज हो गई है। कई लोग लैब-ग्रोन हीरों का उदाहरण दे रहे हैं, जिनकी वजह से प्राकृतिक हीरों के दाम काफी गिर गए थे। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सोने के मामले में फिलहाल ऐसा असर नहीं दिखता।
मुख्य कारण:
प्रक्रिया अभी बहुत महंगी और छोटे पैमाने पर है।
बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए व्यावसायिक फ्यूजन प्लांट चाहिए, जो अभी मौजूद नहीं हैं।
उत्पादित सोना शुरू में कुछ रेडियोएक्टिव आइसोटोप के साथ हो सकता है, इसलिए उसे सालों तक स्टोर करना पड़ सकता है।
दुनिया भर में खदानों से सालाना करीब 3,600-3,700 टन सोना निकलता है। एक-दो प्लांट का उत्पादन वैश्विक आपूर्ति पर बहुत छोटा असर डालेगा।
मल्टीकॉइन कैपिटल के तुषार जैन जैसे निवेशकों ने भी कहा है कि जब तक कम लागत में बड़े पैमाने पर सुरक्षित उत्पादन संभव न हो, तब तक कीमतों पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
0 निष्कर्ष
मैराथन फ्यूजन का दावा वैज्ञानिक रूप से दिलचस्प है और न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन की दिशा में एक कदम है। लेकिन अभी यह प्रयोगशाला स्तर का दावा है, व्यावसायिक तकनीक नहीं। सोने की कीमतें मुख्य रूप से मांग-आपूर्ति, केंद्रीय बैंकों की खरीद, भू-राजनीतिक हालात और आर्थिक संकेतों पर निर्भर करती हैं। फिलहाल निवेशकों को मौजूदा बाजार रुझान पर ध्यान देना चाहिए।

स्रोत: द इकोनॉमिक टाइम्स और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स (अक्टूबर 2026)।


