TTN डेस्क
तपकरा (जशपुर): नागपंचमी के अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध “नागलोक” तपकरा में वन विभाग और Reptile Care and Rescuer Society (RCRS) के संयुक्त तत्वावधान में सर्प जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान स्कूली बच्चों को सांपों के प्रति अंधविश्वास छोड़कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की सीख दी गई।
क्षेत्र में सांपों की विविध व विषैली प्रजातियों की उपस्थिति को देखते हुए यह आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। कार्यक्रम में उपस्थित वन अधिकारियों और सर्प विशेषज्ञों ने बच्चों को निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं की जानकारी दी:
पारिस्थितिक संतुलन: सांप खाद्य श्रृंखला और प्रकृति का अहम हिस्सा हैं, जो चूहों की संख्या को नियंत्रित कर फसलों की रक्षा करते हैं।
सुरक्षा और रेस्क्यू: सांप दिखने पर उन्हें मारने या स्वयं पकड़ने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाएं और प्रशिक्षित सर्प मित्र या वन विभाग को सूचित करें।
अंधविश्वास से दूरी: सांपों के बदला लेने जैसी लोककथाएं निराधार हैं। सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक के चक्कर में पड़े बिना तत्काल अस्पताल पहुंचें।
सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण: प्रकृति सभी जीवों का साझा घर है; वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में उप वनमंडलाधिकारी (कुनकुरी) आशीष आर्य, रेंजर प्रवीण वर्मा, सर्प विशेषज्ञ डॉ. अजय, RCRS अध्यक्ष अविनाश यादव, अजय साहू, सतेंद्र, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण सर्प मित्र उपस्थित रहे। अंत में बच्चों से समाज में सर्प संरक्षण और वैज्ञानिक सोच का प्रसार करने की अपील की गई।


