TTN डेस्क
इंदौर: स्थानीय दलालबाग में मुनिपुंगव सुधा सागर महाराज के चातुर्मास प्रवास के अवसर पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। जैन समाज के श्रद्धालुओं ने अभूतपूर्व भक्ति का परिचय देते हुए इतिहास की सबसे बड़ी बोलियों में से एक लगाई।
🌟 मुख्य आकर्षण एवं बोलियों का विवरण
चक्रवर्ती परिवार का सम्मान: प्रथम मंगल कलश के लिए इंदौर के बिल्डर मनीष-सपना गोधा और आनंद-नवीन गोधा ने रिकॉर्ड ₹16,16,16,016 (16 करोड़ 16 लाख 16 हजार 16 रुपये) की बोली लगाई। सर्वाधिक बोली लगाने के कारण दोनों परिवारों को प्रथम कलश रखने का सौभाग्य और ‘चक्रवर्ती परिवार’ की उपाधि प्राप्त हुई।
श्रावक संस्कार श्रेणी: आकाश और दीपिका कौल ने ₹5.55 करोड़ की बोली लगाई।
0 अन्य प्रमुख कलश बोलियाँ
तृतीय कलश: अशोक रानी डोसी (₹3.55 करोड़)
चतुर्थ कलश: श्रीमती आशा रानी-महेंद्र पाण्ड्या (₹3.33 करोड़)
पंचम कलश: धर्मेंद्र संध्याजी जैन (₹2.11 करोड़)
छठम कलश: हर्ष जैन (₹2.51 करोड़)
सप्तम कलश: सौरभ ललित बड़जात्या (₹3.33 करोड़)
अष्टम कलश: राहुल जैन स्पोर्ट्स (₹1.11 करोड़)
नवम कलश: अक्षय कासलीवाल (₹1.11 करोड़)
❓ क्यों लगती है चातुर्मास में बोली?
जैन धर्म में मुनि श्री के आगमन और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान समाज के लोग पुण्य लाभ और प्रतिनिधित्व अर्जित करने के लिए बोलियाँ लगाते हैं। एकत्रित राशि का उपयोग धर्म कल्याण, समाज सेवा एवं धार्मिक कार्यों में किया जाता है। सर्वाधिक बोली लगाने वाला श्रावक परिवार गाजे-बाजे के साथ अपने घर से मंगल कलश लाकर विधान स्थल पर स्थापित करता है।
इतनी विशाल राशि की घोषणाएँ इंदौर जैन समाज की धर्म के प्रति अगाध आस्था और समर्पण को दर्शाती हैं। 


