00एसईसीएल GM दफ्तर के समक्ष धरने पर डटे प्रभावित, मुआवजा-रोजगार और पुनर्वास की उठाई मांग
00 जयसिंह अग्रवाल बोले— ‘विकास का विरोध नहीं, लेकिन प्रभावितों के हकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी’
TTN डेस्क
कोरबा। मानिकपुर ओपन कास्ट परियोजना विस्तार को लेकर आगामी 25 सितंबर को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले प्रभावित ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। वर्षों से लंबित मुआवजा, रोजगार, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की मांगों को लेकर प्रभावित ग्रामीण मानिकपुर परियोजना के महाप्रबंधक (GM) कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
ग्रामीणों के इस आंदोलन की जानकारी मिलते ही पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल धरना स्थल पहुंचे और प्रभावितों से मुलाकात कर उनके संघर्ष को अपना नैतिक समर्थन दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने वादे के मुताबिक ग्रामीणों के साथ खड़े हैं और जब तक उनकी जायज समस्याओं का ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक उनकी आवाज को हर मंच पर मजबूती से उठाते रहेंगे।
0 संघर्ष का असर: रोजगार प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी
धरना स्थल पर ग्रामीणों ने पूर्व मंत्री को बताया कि लगातार आंदोलन और बढ़ते दबाव के बाद एसईसीएल प्रबंधन द्वारा प्रभावित गांवों के पात्र युवाओं को रोजगार देने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की खबर आई है। ग्रामीणों ने इसे अपने लंबे संघर्ष का पहला सकारात्मक परिणाम बताया। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि जमीन का मुआवजा, पुनर्वास और अन्य लंबित मामलों का भी समयबद्ध निराकरण अनिवार्य है।
0।जनसुनवाई महज औपचारिकता न बने: पूर्व मंत्री
प्रभावितों को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा, “हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत प्रभावित परिवारों के अधिकारों को छीनकर नहीं चुकाई जा सकती। जिन लोगों ने परियोजना के लिए अपनी जमीन, घर और आजीविका खोई है, उनके भविष्य की रक्षा करना प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।”
उन्होंने कहा कि 25 सितंबर को होने वाली पर्यावरणीय जनसुनवाई केवल कागजी औपचारिकता बनकर नहीं रहनी चाहिए। प्रबंधन ग्रामीणों की आपत्तियों को गंभीरता से सुने और लंबित प्रकरणों के निपटारे के लिए एक पारदर्शी कार्ययोजना सार्वजनिक करे। साथ ही रोजगार देने की प्रक्रिया को बिना किसी देरी के पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए
जयसिंह अग्रवाल ने धरनारत ग्रामीणों से लोकतांत्रिक व शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद रखने की अपील करते हुए आश्वस्त किया कि हक की इस लड़ाई में वे अंत तक उनके साथ हैं।
0 क्षमता विस्तार की तैयारी


गौरतलब है कि मानिकपुर परियोजना की वर्तमान उत्पादन क्षमता को 5.25 एमटीपीए से बढ़ाकर 7.0 एमटीपीए किए जाने की प्रक्रिया जारी है, जिसकी पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु 25 सितंबर को जनसुनवाई आयोजित की गई है।


