00 क्या बच्चों को समय पर स्कूल पहुंचने के लिए भी अब गुहार लगानी पड़ेगी?
TTN डेस्क
कोरबा।आज मंगलवार की सुबह कोरबा-इमलीछापर-कुसमुंडा मार्ग पर फिर वही मंज़र देखने को मिला—चारों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें, चीखते हॉर्न और जाम के जाल में फंसी स्कूल बसें/मिनी बस/छोटे वाहन। घंटों से फंसे बच्चों का धैर्य जब जवाब दे गया, तो उन्होंने गाड़ियों के शीशों से हाथ से लिखे पर्चे बाहर निकाले, जिन पर दर्द और बेबसी से लिखा था: “हमें स्कूल जाना है, हमारी मदद करो!”
0 इस परेशानी का ज़िम्मेदार कौन?
❌ अधूरा व कछुआ चाल से चलता सड़क निर्माण
❌ गलत डिज़ाइन का अंडरब्रिज, जिसमें थोड़ा सा पानी भरते ही थम जाते हैं पहिये।रेलवे क्रॉसिंग पर बन रहे ओवर ब्रिज की कछुआ चाल से हो रहा निर्माण।
❌ खदानों की ओर बेखौफ दौड़ती भारी गाड़ियों की ‘यमदूत’ जैसी कतारें।
कब टूटेगी प्रशासन की खामोशी? पालकों की चिंता और बच्चों का भविष्य इस बदहाली की भेंट चढ़ रहा है।
0 जनहित में प्रमुख मांगें:
🔹 सुबह-शाम स्कूल की टाइमिंग के दौरान भारी कोयला गाड़ियों का प्रवेश पर नियंत्रण और पर्याप्त ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था।




🔹 अधूरे निर्माण कार्यों को समय-सीमा तय कर जल्द पूरा कराया जाए।


