TTN डेस्क
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संसद से मात्र 500 मीटर दूर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों को बर्बरता का शिकार बनाया गया। छात्रों पर पैलेट गन चलाई गई, नुकीली (कील लगी) लाठियां मारी गईं और शॉक बैटन का इस्तेमाल किया गया। एक छात्र की आंख की रोशनी चली जाने की आशंका है।
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तस्वीरें दिखाते हुए बताया कि एक छात्र के चेहरे पर पैलेट गन की चोट है। एम्स के मेडिकल सर्टिफिकेट में भी पैलेट गन के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को भी थप्पड़ मारे गए और सादे कपड़ों में आरएसएस के लोग छात्रों को पीटने पहुंचे।
उन्होंने कहा कि आरएएफ और दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन हैं। इसलिए इस कार्रवाई की जिम्मेदारी गृह मंत्री अमित शाह पर है। राहुल ने दो संभावनाएं बताईं—या तो अमित शाह ने पैलेट गन और लाठीचार्ज का आदेश दिया, या उन्हें जानकारी ही नहीं थी। दोनों ही स्थितियों में उन्हें गृह मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए।
इससे पहले भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी के आरोपों का खंडन किया। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि राहुल ने लोकसभा में झूठ बोला है। छात्रों के संसद मार्च में कोई गोली नहीं चली। जब गोली ही नहीं चली तो आदेश कहां से दिया जाएगा।

राहुल गांधी ने लोकसभा में भी इसी मुद्दे पर बोलने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में देश के मुद्दे उठाना उनका कर्तव्य है। छात्रों को पीटना और उन पर घातक बल प्रयोग करना गलत है। पुलिस अब फेस रिकग्निशन से छात्रों को पकड़ रही है, जो अनुचित है।


