TTN डेस्क
रायपुर। छत्तीसगढ़ की माटी की पहचान और विश्वविख्यात पंडवानी गायिका पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं और रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उनका उपचार चल रहा था, जहाँ 70 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से कला जगत और पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है।
0 सामाजिक बेड़ियों को तोड़कर बनाई वैश्विक पहचान
पारंपरिक लोक कला पंडवानी को देश-विदेश तक पहुंचाने में तीजन बाई की ऐतिहासिक भूमिका रही है। उन्होंने उस दौर में पंडवानी की ‘कपालिक शैली’ (मंच पर खड़े होकर प्रदर्शन करना) को अपनाया, जब यह कला पूरी तरह पुरुष कलाकारों तक सीमित मानी जाती थी। अपनी दमदार आवाज़, प्रभावशाली अभिनय और हाथ में तंबूरा लेकर महाभारत के पात्रों को जीवंत करने की उनकी अनूठी शैली ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई।
0 मुख्यमंत्री साय ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
निधन की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एम्स रायपुर पहुंचे। उन्होंने डॉ. तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिजनों से भेंट कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
”डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना और विलक्षण प्रतिभा से पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई तथा छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। उनका निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।”
— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री
इस दुखद घड़ी में उद्योगमंत्री लखनलाल देवांगन,




स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा सहित कई जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ कलाकारों ने भी तीजन बाई को याद कर नमन किया है।

