
00 डॉ. चरणदास महंत बोले— “सरकारी अधिकारी की भाषा आरक्षित वर्ग का अपमान, मुख्यमंत्री की चुप्पी पर उठाए सवाल”
TTN डेस्क
रायपुर।छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क विभाग की पत्रिका के सलाहकार संपादक डॉ. अनिल द्विवेदी द्वारा सोशल मीडिया पर आरक्षण व्यवस्था को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर सियासत गर्मा गई है। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस पोस्ट पर कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश के करोड़ों आरक्षित वर्ग के लोगों का सीधा अपमान करार दिया है।
0 संविधान और सामाजिक न्याय का उल्लंघन
डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि आरक्षण देश के संविधान द्वारा प्रदत्त सामाजिक न्याय का अधिकार है। आरक्षण प्राप्त करने वाले लोगों की तुलना आपत्तिजनक और अमर्यादित शब्दों से करना किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि पूरे समाज का अपमान है। विवाद बढ़ने के बाद पोस्ट हटा लेना या महज खेद प्रकट कर देना इस अपराध को कम नहीं करता। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी मानसिकता वाले व्यक्ति को सरकार के जनसंपर्क विभाग में इतने महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी कैसे दी गई?
0 मुख्यमंत्री की चुप्पी पर खड़े किए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को घेरते हुए कहा कि जनसंपर्क विभाग स्वयं मुख्यमंत्री के पास है और वे स्वयं आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके मंत्रिमंडल में भी अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के प्रमुख चेहरे शामिल हैं। ऐसे में इस संवेदनशील मामले पर मुख्यमंत्री की चुप्पी से प्रदेश के आरक्षित वर्गों में गलत संदेश जा रहा है। सरकार की यह खामोशी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और विरोधाभासी है।
0 सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ने का ऐलान
संत रविदास जयंती जैसे पवित्र अवसर का उल्लेख करते हुए डॉ. महंत ने कहा कि जहाँ एक ओर देश भर में सामाजिक समरसता और समानता का संदेश दिया जा रहा है, वहीं शासन के जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति अपमानजनक टिप्पणी कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को शांत नहीं होने देगी और प्रदेश के हर शहर व कस्बे तक जाकर सरकार से जवाब मांगेगी। सामाजिक न्याय के अधिकार और आरक्षित वर्ग के सम्मान से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।


