00 रूढ़िवादी सोच को पीछे छोड़ औद्योगिक सुरक्षा के क्षेत्र में महिलाओं ने पेश की मिसाल
TTN डेस्क
बालकोनगर, 23 जुलाई।कभी सुरक्षा को केवल शारीरिक क्षमता से जोड़कर देखा जाता था और महिलाओं को सुरक्षा की आवश्यकता वाले वर्ग के रूप में ही सीमित माना जाता था। हालांकि, बदलते दौर के साथ यह सोच भी तेजी से बदल रही है। आज महिलाएं केवल अपनी सुरक्षा तक सीमित न रहकर औद्योगिक सुरक्षा जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।
इस ऐतिहासिक बदलाव की प्रत्यक्ष झलक भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) के सेंट्रल सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (सीएसओसी) में देखने को मिल रही है। बालको ने अपनी सुरक्षा प्रणाली को नया रूप देते हुए इसे पूर्णतः महिलाओं द्वारा संचालित ‘शी-एसओसी’ (Security Harmony & Excellence) के रूप में विकसित किया है। यह पहल उन पुरानी रूढ़िवादी धारणाओं को तोड़ती है जहाँ सुरक्षा को केवल शारीरिक शक्ति का पर्याय माना जाता था। ‘शी-एसओसी’ एक ऐसी आधुनिक सुरक्षा संस्कृति का प्रतीक बनकर उभरा है, जहाँ योग्यता, निरंतर सतर्कता, तकनीकी निपुणता और आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को प्राथमिक महत्व दिया जाता है।
00 सुरक्षा का मुख्य नियंत्रण केंद्र: 24 घंटे अलर्ट मोड पर महिला टीम
बालको का सीएसओसी पूरे संयंत्र परिसर की सुरक्षा व्यवस्था का हृदय स्थल (मुख्य नियंत्रण केंद्र) है। यह केंद्र वर्ष के 365 दिन और 24 घंटे बिना रुके संचालित होता है। संयंत्र के विस्तृत क्षेत्र में स्थापित सैकड़ों अत्याधुनिक सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की लगातार मॉनिटरिंग करना, सुरक्षा संबंधी किसी भी अलर्ट का तुरंत विश्लेषण करना, और किसी आपातकालीन स्थिति में तुरंत समन्वय बनाकर फील्ड में तैनात सुरक्षा टीमों को दिशा-निर्देश देना—इन सभी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को अब महिलाओं की टीम बखूबी संभाल रही है।यह केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि महिला कर्मचारियों की क्षमता, नेतृत्व कौशल और पेशेवर दक्षता पर संगठन के अटूट विश्वास को दर्शाता है।
0 आधुनिक सुरक्षा में धैर्य और तार्किक सोच की भूमिका
आज के समय में औद्योगिक सुरक्षा का स्वरूप तेजी से बदला है। वर्तमान दौर में केवल बल प्रयोग से अधिक धैर्य, सूक्ष्म से सूक्ष्म बारीकियों पर ध्यान देने, तार्किक सोच और बेहतर संवाद कौशल की आवश्यकता होती है। महिलाओं की भागीदारी इन सभी पहलुओं को और अधिक सुदृढ़ बनाती है, जिससे पूरे संयंत्र की सुरक्षा प्रणाली अधिक प्रभावी, संतुलित और त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनती है।
0 नेतृत्व संभाल रहीं महिला अधिकारियों का क्या है कहना?
वर्षा द्विवेदी (प्रभारी, शी-एसओसी):
”बालको प्रबंधन ने हमें इस महत्वपूर्ण सुरक्षा संचालन का नेतृत्व करने का अवसर और भरोसा दिया है। आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों, नवीन तकनीकों और समय-समय पर मिलने वाले उन्नत प्रशिक्षण ने हमारे आत्मविश्वास को काफी मजबूत किया है। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने से सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित हुई है।”
रेखा श्रीवास्तव (सुरक्षा टीम सदस्य):
”सुरक्षा क्षेत्र में महिलाओं को लेकर बनी पुरानी सोच को बदलने की सख्त जरूरत थी। सुरक्षा का वास्तविक अर्थ केवल शारीरिक ताकत नहीं, बल्कि अनुशासन, ईमानदारी, सजगता और त्वरित निर्णय क्षमता है। महिला टीम ने यह साबित किया है कि किसी भी बड़ी जिम्मेदारी को निभाने की क्षमता लिंग से नहीं, बल्कि योग्यता और समर्पण से तय होती है।”
पूजा टंडन (सुरक्षा टीम सदस्य):
”इस क्षेत्र में हर दिन नई चुनौतियाँ सामने आती हैं, जो हमें सीखने और खुद को बेहतर बनाने का मौका देती हैं। जब किसी आपात स्थिति में हमारे द्वारा सही समय पर लिया गया एक त्वरित फैसला किसी बड़े जोखिम को टाल देता है, तब अपने काम की वास्तविक सार्थकता महसूस होती है।”
0 समावेशी कार्य संस्कृति और सशक्त नेतृत्व की मिसाल

बालको का ‘शी-एसओसी’ इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि विविधता, समान अवसर और योग्यता पर आधारित कार्य संस्कृति किसी भी औद्योगिक संस्थान को अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाती है। महिलाओं के पूर्ण नियंत्रण में संचालित यह सुरक्षा केंद्र न केवल उनके नेतृत्व कौशल को नई पहचान दे रहा है, बल्कि यह भी संदेश दे रहा है कि सही अवसर और प्रशिक्षण मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर सकती हैं।


