

00 उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में सी.पी. राधाकृष्णन का चयन भाजपा की क्षेत्रीय और वैचारिक दोनों रणनीतियों को दर्शाता है। एनडीए की मजबूत स्थिति को देखते हुए उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।
TTN Desk
भाजपा ने 17 अगस्त 2025 को महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का उम्मीदवार घोषित किया। यह फैसला मौजूदा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के कथित स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद लिया गया है। उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर 2025 को होगा और नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 22 अगस्त 2025 है।
0 कौन है राधाकृष्णन
तमिलनाडु के तिरुप्पुर में 1957 में जन्मे, सी.पी. राधाकृष्णन एक अनुभवी राजनीतिज्ञ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवक हैं।
राजनीतिक जीवन: वह तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं और 1998 और 1999 में कोयंबटूर से दो बार लोकसभा सांसद चुने गए।
राजकीय पद: वर्तमान में वह महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं और इससे पहले झारखंड के राज्यपाल के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
योग्यता: राधाकृष्णन को उनकी बेदाग छवि और संगठनात्मक क्षमताओं के लिए जाना जाता है। उन्होंने तमिलनाडु में निटवेयर निर्यात उद्योग के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे वह उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जैसे पदों के लिए एक उपयुक्त विकल्प बन जाते हैं।
0 चुनाव की रणनीति और समीकरण
यह चुनाव लोकसभा और राज्यसभा के 786 सदस्यों द्वारा लड़ा जाएगा। एनडीए के पास 422 सदस्यों का बहुमत है, जो जीत के लिए जरूरी 394 वोटों से काफी अधिक है।
भाजपा की रणनीति: भाजपा का यह कदम दक्षिण भारत, विशेष रूप से तमिलनाडु में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि सहयोगी दलों जैसे जनता दल (यूनाइटेड) और तेलुगु देशम पार्टी का समर्थन मिलने से राधाकृष्णन की जीत सुनिश्चित हो जाएगी, और संभवतः चुनाव निर्विरोध भी हो सकता है।
विपक्ष की स्थिति: विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया ब्लॉक’ ने अभी तक अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, हालांकि डॉ. केशव राव का नाम चर्चा में है।
0 भाजपा ने इस बार विचार को सर्वाधिक महत्व दिया साथ ही दक्षिण में विस्तार पर भी नजर
इस बार बीजेपी ने वैचारिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार का चयन किया है। सीपी राधाकृष्णन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं और जनसंघ में रहे हैं। जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे के बाद से यह साफ माना जा रहा था कि बीजेपी इस बार पिछली बार जैसा प्रयोग नहीं दोहराएगी। जगदीप धनखड़ बीजेपी के विचार से नहीं आते थे। उन्होंने अपनी राजनीति की शुरूआत जनता दल से की थी और फिर कांग्रेस में भी रहे। उसके बाद वह बीजेपी में शामिल हुए। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रहे और फिर उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया। राज्यपाल रहते उनका पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लगातार टकराव रहा, लेकिन सीपी राधाकृष्णन विचार परिवार से भी आते हैं और तमिलनाडु में बीजेपी की पहचान बनाने में इन्होंने काफी मेहनत भी की थी। राधाकृष्णन तमिलनाडु में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं।


