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बड़ी खबर …वेदांता पावर प्लांट हादसा: FIR में अनिल अग्रवाल का नाम आने पर नवीन जिंदल ने जताई आपत्ति

// मनोज शर्मा //

00 सवाल उठाया— क्या रेलवे या सार्वजनिक उपक्रम के हादसों में भी चेयरमैन पर होती है कार्रवाई?

00 बिफरे जिंदल ने औद्योगिक एवं व्यवसायिक संगठनों को भी लिया घेरे में

कोरबा ।छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंहीतराई में स्थित वेदांता पावर प्लांट हादसे के बाद कानूनी कार्रवाई को लेकर देश के जाने-माने उद्योगपति और कुरुक्षेत्र के पूर्व सांसद नवीन जिंदल ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इस मामले में दर्ज प्राथमिकी (FIR) में वेदांता समूह के प्रमुख अनिल अग्रवाल का नाम शामिल किए जाने पर उन्होंने गंभीर चिंता जताई है।

जिंदल ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से जांच प्रक्रिया और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसे उद्योग जगत के लिए एक नकारात्मक संदेश बताया है।

0 दोहरे मापदंड पर उठाए सवाल

नवीन जिंदल ने ट्वीट कर सरकार और जांच एजेंसियों से पूछा कि जब सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) या रेलवे में कोई बड़ा हादसा होता है, तो क्या उसके चेयरमैन का नाम सीधे FIR में दर्ज किया जाता है? उन्होंने जोर देते हुए कहा, “जो मानक सरकारी क्षेत्र के लिए अपनाए जाते हैं, वही निजी क्षेत्र पर भी लागू होने चाहिए। श्री अनिल अग्रवाल का उस प्लांट के दैनिक संचालन में कोई सीधा रोल नहीं है।”

0″पहले हो जांच, फिर तय हो जिम्मेदारी”

जिंदल ने वेदांता हादसे को बेहद दुखद बताते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने मांग की है कि:

* पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और आजीविका सहायता सुनिश्चित की जाए।

* मामले की निष्पक्ष और गहन जांच हो।

* सबूतों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए और उसके बाद ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हो।

0 अनिल अग्रवाल की सराहना की, होगा निवेश पर असर

उन्होंने श्री अनिल अग्रवाल के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए उन्हें एक ‘सेल्फ-मेड मैन’ बताया, जिन्होंने एक पिछड़े समाज से निकलकर वैश्विक स्तर पर उद्यम खड़ा किया है। जिंदल ने कहा कि भारत के ‘विकसित भारत’ के विजन के लिए निवेशकों का सिस्टम पर भरोसा होना जरूरी है। बिना जांच के बड़े उद्योगपतियों को सीधे आरोपी बनाने से निवेश के माहौल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

0 औद्योगिक संगठनों की ‘चुप्पी’ पर सवाल

नवीन जिंदल ने अपनी उक्त पोस्ट को टैग करते हुए एक दूसरी तीखी पोस्ट की जिसमें उन्होंने देश के प्रमुख व्यापारिक निकायों (CII, ASSOCHAM, FICCI, PHD Chamber और ICC) को आड़े हाथों लेते हुए उनकी नैतिक जिम्मेदारी की याद दिलाई है। उनके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

मौन तटस्थता नहीं: जिंदल के अनुसार, जब उचित प्रक्रिया (Due Process) का उल्लंघन होता है, तो इन संगठनों की चुप्पी को निष्पक्षता नहीं, बल्कि उनके मूल कर्तव्य की विफलता माना जाना चाहिए।

निवेशकों का भरोसा: उन्होंने तर्क दिया कि वेदांत के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के खिलाफ “आधारहीन” FIR जैसे कदम देश में निवेशकों के आत्मविश्वास को चोट पहुँचाते हैं।

सिर्फ नीतिगत चर्चा काफी नहीं: संगठनों को केवल सम्मेलनों और नीतिगत पत्रों (Policy Papers) तक सीमित न रहकर न्याय और सही के पक्ष में मुखर होकर खड़ा होना चाहिए।

अस्तित्व का उद्देश्य: जिंदल ने जोर देकर कहा कि इन चैम्बर्स का मुख्य उद्देश्य उद्योग जगत के हितों की रक्षा करना और अन्याय के खिलाफ बोलना है।

जिंदल का यह बयान प्रदेश की राजनीति और औद्योगिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ चुका है, विशेषकर ऐसे समय में जब स्थानीय स्तर पर हादसे की जांच जारी है।