//मनोज यू शर्मा//
00 अडानी समूह के खिलाफ अनिल अग्रवाल की शिकायत और सुप्रीम कोर्ट में जारी कॉरपोरेट विवाद के बीच हुई प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई
नई दिल्ली/कोरबा। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार 2 जून को दिग्गज कॉरपोरेट कंपनी ‘वेदांता समूह’ (Vedanta Group) के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए उसके विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की है। विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत संदिग्ध विदेशी मुद्रा उल्लंघनों और सीमा पार वित्तीय लेन-देन की जांच के सिलसिले में यह तलाशी अभियान चलाया गया।कोरबा स्थित बालकों की वेदांता पेरेंट कम्पनी है। डिमर्जर के साथ बनने जा रही वेदांता एल्यूमिनियम के तहत बालकों और उड़ीसा के झारसुगुड़ा स्थित वेदांता एल्यूमिनियम और लांझीगढ़ की रिफाइनरी भी आएगी।वहीं जांजगीर चांपा जिले का पावर प्लांट वेदांता पावर के अधीन होगा।जाहिर है इसीलिए ईडी की आज हुई कार्यवाही और पावर प्लांट हादसे, जिसमें 25 लोगों की जान चली गई, के मामले में वेदांता समूह के प्रमुख दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल को नामजद आरोपी बनाने को ले कर स्थानीय स्तर पर भी विभिन्न चर्चाओं ने जन्म ले लिया है।
ईडी की यह कार्रवाई दिल्ली, राजस्थान,मुंबई और कई अन्य प्रमुख स्थानों पर स्थित कंपनी के परिसरों में की गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई फेमा के दीवानी प्रावधानों के तहत कथित फंड ट्रांसफर और विदेशी लेन-देन से जुड़ी गड़बड़ियों को लेकर शुरू की गई है। इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए वेदांता समूह के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और मांगी जा रही सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा रही है।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि वेदांता समूह डिमर्जर के बाद बनी अपनी 5 नई कम्पनियों को शेयर बाजार में लिस्ट कराने और शेयर धारकों को शेयर देने की कार्यवाही को पूर्ण करने में जुटा हुआ है,इस बीच इस छापेमारी ने कॉरपोरेट वर्ल्ड ही नहीं आम निवेशकों के बीच भी चर्चा खड़ी कर दी है कि आखिर इस कार्यवाही की असल जड़ में क्या है? ईडी की कार्यवाही का नकारात्मक असर वेदांता समूह की कम्पनियों पर पड़ा है।
0 अडानी समूह से कॉरपोरेट विवाद के बीच हुई कार्रवाई
ईडी की यह छापेमारी ऐसे समय में हुई है जब वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और गौतम अडानी के बीच एक बड़ा कॉरपोरेट विवाद चल रहा है। मार्च 2026 के अंत में अनिल अग्रवाल ने दावा किया था कि वेदांता को दिवालिया हो चुकी कंपनी ‘जयप्रकाश एसोसिएट्स’ (जेपी ग्रुप) की संपत्तियों को खरीदने के लिए लिखित पुष्टि मिल चुकी थी और कंपनी ने यह बोली (बिड) जीत ली थी। हालांकि, बाद में इस फैसले को पलटकर यह डील अडानी समूह के पक्ष में कर दी गई।
0 मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
इस फैसले से असंतुष्ट होकर वेदांता समूह ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) और बाद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वेदांता ने करीब $4 बिलियन (लगभग ₹14,500 से ₹16,000 करोड़) मूल्य की इन संपत्तियों के लिए अडानी समूह की समाधान योजना (Resolution Plan) पर रोक लगाने की मांग की है।
वेदांता का आरोप है कि जेपी एसोसिएट्स के लेनदारों की समिति (CoC) ने प्रक्रिया में निष्पक्षता नहीं बरती। नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) के आधार पर वेदांता की ₹12,505.85 करोड़ की बोली सबसे ऊंची (Highest Bid) थी, लेकिन इसके बावजूद बैंकों ने तत्काल नकद भुगतान के आधार पर अडानी समूह की योजना को मंजूरी दे दी। अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह ने इस पूरी प्रक्रिया को देश की सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी है, जिसके बाद दोनों बड़े कॉरपोरेट घरानों के बीच का यह विवाद अब चर्चा का विषय बना हुआ है।


