





TTN डेस्क
कोरबा: औद्योगिक नगरी कोरबा के बालको क्षेत्र से निकलने वाली प्रमुख सड़कें इन दिनों बदहाली के आंसू रो रही हैं। सड़कों की जर्जर स्थिति, बड़े-बड़े गड्ढे और भारी वाहनों की अवैध पार्किंग से परेशान होकर अब बालको क्षेत्र के अधिवक्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है। बालको क्षेत्र में रहने वाले वकीलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कोरबा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सड़कों की तत्काल मरम्मत कराने, स्ट्रीट लाइट दुरुस्त करने और भारी वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
0 मुख्य मार्ग जर्जर, रेंगने को मजबूर आम नागरिक
कलेक्टर को सौंपे गए पत्र में अधिवक्ताओं ने बताया कि बालको से कोरबा पहुंचने के लिए वैसे तो तीन प्रमुख मार्ग हैं, लेकिन उनमें से दो मार्गों पर भारी वाहनों की चौबीसों घंटे आवाजाही और सड़क किनारे होने वाली अवैध पार्किंग के कारण आम नागरिक वहां से जाने से कतराते हैं। मजबूरी में अधिकांश जनता बालको-गायत्री मंदिर, भदरापारा-रिसदा चौक, ढेंगुनाला पुल और लालघाट मार्ग का उपयोग करती है, लेकिन विडंबना यह है कि अब यह मार्ग भी पूरी तरह से जर्जर हो चुका है।
0 गहरे गड्ढे में फंसी अधिवक्ता की कार
मार्ग की वास्तविक भयावह स्थिति को बयां करते हुए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि बीते कल यानी 8 जुलाई 2026 को इसी मार्ग पर एक अधिवक्ता की कार गहरे गड्ढे में फंस गई, जिससे उनका वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। स्थानीय नागरिकों और एक ट्रैक्टर चालक की सूझबूझ व कड़ी मशक्कत के बाद जैसे-तैसे कार को बाहर निकाला जा सका।
0 ढेंगुनाला पुल पर मौत को आमंत्रण देती गहरी दरारें
अधिवक्ताओं ने ढेंगुनाला पुल की स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि:
पुल के दोनों ओर बड़े-बड़े और जानलेवा गड्ढे हो चुके हैं।
पुल और सड़क के जोड़ (Joint) पर गहरी दरारें आ चुकी हैं।
पुल के ऊपर कंक्रीट उखड़ने से लोहे की सरिया बाहर निकल आई है, जो किसी भी वक्त किसी बड़े हादसे या जनहानि का सबब बन सकती है।
इस मार्ग से रोजाना हजारों स्कूली बच्चे, कॉलेज के विद्यार्थी, जिला अस्पताल जाने वाले मरीज, एम्बुलेंस, पुलिस लाइन के अधिकारी-कर्मचारी और तहसील व न्यायालय आने वाले वकील गुजरते हैं। वर्षों से समुचित मरम्मत न होने के कारण यहाँ आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
0 अधिवक्ताओं ने प्रशासन के सामने रखीं ये 6 प्रमुख मांगें
तत्काल मरम्मत व पुनर्निर्माण: बालको-रिसदा चौक-ढेंगुनाला पुल, लालघाट और परसाभांठा मार्ग की तुरंत मरम्मत और आवश्यकतानुसार नया निर्माण कराया जाए।
पुल की तकनीकी जांच: ढेंगुनाला पुल की किसी तकनीकी टीम से जांच कराकर सुरक्षा कार्य तत्काल शुरू किए जाएं।
स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था: रात के अंधेरे में होने वाले हादसों को रोकने के लिए पूरे मार्ग पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएं।
’नो एंट्री’ का कड़ाई से पालन: स्कूल और कॉलेज के समय (सुबह और दोपहर में) इस मार्ग पर भारी वाहनों के प्रवेश को पूरी तरह प्रतिबंधित (No Entry) किया जाए।
अवैध पार्किंग पर कार्रवाई: सड़क किनारे ट्रेलर, ट्रक और अन्य भारी वाहनों की अवैध पार्किंग के खिलाफ नियमित अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाए।
यातायात पुलिस की निगरानी: सुगम और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए यातायात पुलिस और संबंधित विभाग द्वारा इस मार्ग की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।
अधिवक्ताओं ने दोटूक शब्दों में कहा है कि यह केवल सड़क का मसला नहीं है, बल्कि हजारों नागरिकों के जीवन और सुरक्षा का गंभीर प्रश्न है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस संवेदनशील मामले पर कितनी जल्दी संज्ञान लेता है।


