TTN डेस्क
मुंबई/हिसार/कोरबा। देश के प्रख्यात उद्योगपति एवं एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा के पिता, वरिष्ठ समाजसेवी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के समर्पित स्वयंसेवक श्री नंद किशोर गोयनका जी का सोमवार दोपहर 12:30 बजे मुंबई स्थित उनके निवास पर निधन हो गया। वे 96 वर्ष के थे। उनके निधन से एस्सेल परिवार, सामाजिक संगठनों, वैश्य समाज, अग्रोहा धाम और देश-प्रदेश सहित उर्जाधानी कोरबा के अग्रेवाल समाज में भी शोक की लहर है।
0 1960 के दशक में कोरबा में डाली थी दुकान, शिक्षण संस्थानों के विकास में रहे साक्षी
दिवंगत श्री नंद किशोर गोयनका जी का छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहर कोरबा से भी बेहद आत्मीय और गहरा जुड़ाव रहा था। उन्होंने 1960 के दशक में कोरबा में गल्ले (अनाज) की दुकान डाली थी और यहां से व्यापार की मजबूत नींव रखने की शुरुआत की थी।
इसके बाद, महाराजा अग्रसेन की ऐतिहासिक राजधानी अग्रोहा धाम के विकास के प्रारंभिक चरण के दौरान वे विशेष रूप से कोरबा प्रवास पर आए थे, जहां उन्होंने स्थानीय अग्रसेन भवन में समाज के अग्रणी जनों की एक महत्वपूर्ण बैठक ली थी। कोरबा के शैक्षणिक विकास में भी उनकी गहरी रुचि थी; वे स्थानीय अग्रसेन विद्यालय और अग्रसेन कन्या महाविद्यालय के विभिन्न चरणों के विकास कार्यों एवं लोकार्पण समारोहों के दौरान मुख्य रूप से शामिल होने कोरबा आए थे। उनका जाना कोरबा के अग्रवंशियों के लिए एक बड़ी क्षति की तरह है।
0 अंतिम संस्कार कार्यक्रम: बुधवार को अग्रोहा धाम में पंचतत्व में विलीन होगी पार्थिव देह
श्री गोयनका जी के अंतिम विदाई की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जा रही है:
मुंबई में अंतिम दर्शन: वर्तमान में उनका पार्थिव शरीर मुंबई स्थित उनके निवास (ए रोड, वसंत सागर, मरीन ड्राइव) पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है।
चार्टर्ड विमान से हिसार प्रस्थान: मंगलवार, 14 जुलाई को प्रातः 7 बजे उनका पार्थिव शरीर चार्टर्ड विमान से हरियाणा के पैतृक शहर हिसार लाया जाएगा। इसके बाद दोपहर में अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव देह को ‘गोयनका हाउस’ (166, कृष्णा मंडी, हिसार) में रखा जाएगा।
अंतिम संस्कार (15 जुलाई): श्री नंद किशोर गोयनका जी का अंतिम संस्कार 15 बुधवार को सुबह 11 बजे हिसार में किया जाएगा। उनकी पार्थिव देह अग्रोहा धाम स्थित ‘गोयनका उद्यान’ में पंचतत्व में विलीन होगी। बता दें कि उनकी धर्मपत्नी का अंतिम संस्कार भी इसी पवित्र स्थान पर किया गया था।
0 सादगी, संस्कार और राष्ट्रसेवा को समर्पित रहा जीवन
28 सितंबर 1930 को हिसार में जन्मे श्री नंद किशोर गोयनका जी ने अपना पूरा जीवन सादगी, सेवा और सामाजिक समर्पण के साथ व्यतीत किया। देश के शीर्ष औद्योगिक घरानों (एस्सेल ग्रुप/ज़ी नेटवर्क) से ताल्लुक रखने के बावजूद उन्होंने स्वयं को व्यावसायिक चकाचौंध से दूर रखा।
वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक निष्ठावान स्वयंसेवक थे और संगठन में विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। महाराजा अग्रसेन की ऐतिहासिक राजधानी अग्रोहा धाम की स्थापना और उसके वैश्विक विकास में उनकी भूमिका मुख्य सूत्रधार की रही।
0 गौ सेवा, शिक्षा और समाज को सशक्त बनाने में उल्लेखनीय योगदान
हिसार और राष्ट्र के सामाजिक-शैक्षणिक विकास में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा:
गौ सेवा: वे ‘श्री देवी भवन मंदिर गौशाला ट्रस्ट’ के संरक्षक तथा ‘श्री वैष्णव अग्रसेन गौशाला’ के अध्यक्ष और संरक्षक रहे। उन्होंने आजीवन गौ संरक्षण को बढ़ावा दिया।
बालिका शिक्षा: शिक्षा के क्षेत्र में वे ‘फतेहचंद महिला महाविद्यालय’ के चेयरमैन तथा ‘जीएनजी गोयनका स्कूल’ (पड़ाव चौक, हिसार) के संरक्षक रहे और समाज के अंतिम छोर तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाई।
वैश्य समाज का संगठन: उन्होंने वैश्य अग्रवाल
समाज को संगठित, सशक्त और एकजुट करने के लिए निरंतर प्रयास किए।
उनका आत्मीय व विनम्र व्यवहार और समाज के हर वर्ग से सीधे जुड़ने की कला उन्हें एक विरला व्यक्तित्व बनाती थी। उनके निधन से सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और वैचारिक जगत ने एक सच्चे मार्गदर्शक को खो दिया है।

