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युद्ध से तेल संकट : हमें किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं, बस सिस्टम बाधा बनना बंद करें : अनिल अग्रवाल

00 इजरायल-ईरान युद्ध के बीच वेदांता चेयरमैन का बड़ा बयान; कहा- धरती मां ने भारत को सब कुछ दिया है पर…

II मनोज यू शर्मा ll

कोरबा। दुनिया के मौजूदा हालातों और कच्चे तेल के संकट के बीच वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भारत की आत्मनिर्भरता को लेकर एक भावुक और विजनरी पोस्ट लिखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को उन युद्धों की कीमत रॉ मैटिरियल की कमी के रूप में नहीं चुकानी चाहिए, जिनसे हमारा कोई लेना-देना नहीं है।

0 90% तेल बाहर से क्यों मँगाएँ ?

अनिल अग्रवाल ने सवाल उठाया कि भारत अपनी जरूरत का 90% तेल, 95% कॉपर और 99.5% सोना बाहर से क्यों आयात करता है? उन्होंने कहा, “40 साल इस इंडस्ट्री में बिताने के बाद मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ कि हमारी जियोलॉजी दुनिया में सबसे बेहतरीन है। अब समय आ गया है कि सरकार उद्यमियों को इस क्षेत्र में काम करने की पूरी स्वतंत्रता दे।”

0 ‘जीरो’ से ‘वेदांता’ तक का सफर और अधूरा सपना

अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि वे 19 साल की उम्र में बिहार से बिना किसी गॉडफादर के बॉम्बे आए थे। उनका एकमात्र सपना भारत को आत्मनिर्भर बनाना था। उन्होंने बताया कि निजीकरण कार्यक्रम के तहत हिंदुस्तान जिंक और बाल्को में उत्पादन को 10 से 20 गुना बढ़ाया गया, जिससे हजारों सहायक कंपनियाँ खड़ी हुईं। हालांकि, उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सरकार के पास अभी भी इन कंपनियों में स्टेक (26% और 49%) बचा है, जिसे एग्रीमेंट के तहत ट्रांसफर होना चाहिए था।

0 भविष्य का लक्ष्य: 10 लाख बैरल तेल प्रतिदिन

वेदांता ने पिछले 10 वर्षों में सरकारी खजाने में ₹4.5 लाख करोड़ का योगदान दिया है। अग्रवाल ने भविष्य का रोडमैप साझा करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य अब 10 लाख बैरल तेल और गैस प्रतिदिन और 10 करोड़ टन आयरन ओर के उत्पादन का है।

0 सिस्टम और लालफीताशाही पर कड़ा प्रहार

उन्होंने रियो टिंटो का उदाहरण देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के डायमंड प्रोजेक्ट को सिस्टम की जटिलता के कारण बाहर जाना पड़ा। उन्होंने सुझाव दिया कि:
‘Lengthy Approvals’ की जगह Self-Certification होना चाहिए। उद्यमियों को नोटिस और ज्यूडिशियल एक्शन की जगह सम्मान और ‘बेनिफिट ऑफ डाउट’ मिले।
सरकार ‘Revenue-minded’ होने के बजाय ‘Production-minded’ बने।

0 प्रधानमंत्री के शब्दों से मिला हौसला

एक व्यक्तिगत दुख का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उनके परिवार पर आई मुसीबत के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों ने उन्हें हौसला दिया। प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था— “आपको मजबूत रहना चाहिए और वह काम जारी रखना चाहिए जो भारत के लिए महत्वपूर्ण है।”
अंत में उन्होंने अपील की: “व्यवस्था को सरल रखें और नियमों को सीमित। आइए मिलकर भारत और भारतीयों को गर्व महसूस कराएं और देश को विकसित राष्ट्र बनाने में योगदान दें।”