00 मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में खुला देश के औद्योगिक विकास का नया अध्याय; शेयरधारकों को 5 वर्षों में मिला 300% से अधिक का रिटर्न
TTN डेस्क
मुम्बई/कोरबा। भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास में विगत सोमवार को वेदांता समूह ने एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। समूह की चार नव-डिमर्ज्ड (अलग हुई) कंपनियों— वेदांता एल्युमिनियम, वेदांता ऑयल एंड गैस, वेदांता आयरन एंड स्टील और वेदांता पावर ने बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर एक साथ लिस्टिंग कर ट्रेडिंग की शुरुआत कर दी है। यह कदम रणनीतिक धातुओं, क्रिटिकल मिनरल्स और ऊर्जा क्षेत्र में वैल्यू अनलॉक करने तथा भारत को वैश्विक विनिर्माण शक्ति बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
0 वेदांता एल्युमिनियम बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा चैंपियन; तीन साल में क्षमता होगी 60 लाख टन
वेदांता समूह ने अपनी इस नई शुरुआत में एल्युमिनियम सेक्टर को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है। बालको (BALCO) में मात्र 1 लाख टन उत्पादन से शुरू हुई यह यात्रा आज 30 लाख टन प्रतिवर्ष की विशाल क्षमता तक पहुंच चुकी है, जिससे वेदांता चीन के बाहर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है। इसका मुख्य आधार ओडिशा के झारसुगुड़ा में स्थित दुनिया का सबसे बड़ा एल्युमिनियम स्मेल्टर है।वही कोरबा के बालको प्लांट की क्षमता भी अब एक मिलियन टन की हो गई है।
अब स्वतंत्र रूप से सूचीबद्ध होने के बाद वेदांता एल्युमिनियम (BSE: 544780, NSE: VAML) अगले तीन वर्षों में अपनी क्षमता को दोगुना कर 60 लाख टन प्रतिवर्ष करने जा रही है। कंपनी का लक्ष्य दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे कम लागत वाला पूर्णतः एकीकृत एल्युमिनियम उत्पादक बनना है, जो देश के हजारों डाउनस्ट्रीम उद्योगों को बढ़ावा देकर भारत के व्यापक औद्योगिकीकरण को नई गति देगा।
0 लंदन से मुंबई तक का सफर, भारत को आत्मनिर्भर बनाना लक्ष्य: अनिल अग्रवाल
लिस्टिंग समारोह को संबोधित करते हुए वेदांता समूह के चेयरमैन श्री अनिल अग्रवाल ने भावुक होते हुए कहा, “24 वर्ष पहले वेदांता लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी थी। आज वह छोटा सा बीज एक विशाल बरगद का पेड़ बन चुका है। अब इस अभूतपूर्व विकास का अगला अध्याय मुंबई से शुरू हो रहा है, जहां से मेरी कारोबारी यात्रा शुरू हुई थी।”
उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में समूह ने शेयरधारकों को 300 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया है, जो निफ्टी से पांच गुना अधिक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई और एनर्जी ट्रांजिशन के इस दौर में खनिजों की मांग बढ़ेगी। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का 50% आयात करता है, जिसे कम कर देश को आत्मनिर्भर बनाना ही इन कंपनियों का मुख्य उद्देश्य है।
0 बाकी तीन कंपनियों का भी मजबूत रोडमैप, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे को मिलेगी मजबूती
वेदांता ऑयल एंड गैस (BSE: 382914, NSE: VOGL): देश की यह सबसे बड़ी निजी तेल उत्पादक कंपनी पूरी तरह ऋण-मुक्त बैलेंस शीट के साथ बाजार में उतरी है। कंपनी अगले 3 से 5 वर्षों में 5 अरब डॉलर का निवेश कर अपना उत्पादन 5 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंचाएगी, जिससे भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी।
वेदांता आयरन एंड स्टील (BSE: 544784, NSE: VISL): 4 अरब टन के विशाल लौह अयस्क संसाधन के साथ यह ऋण-मुक्त कंपनी वर्तमान के 40 लाख टन स्टील उत्पादन को बढ़ाकर 1.5 करोड़ टन प्रतिवर्ष करने के रोडमैप पर काम कर रही है। इसका मुख्य फोकस ग्रीन स्टील और स्पेशियलिटी स्टील पर होगा।
वेदांता पावर (BSE: 544781, NSE: VED POWER): 4.2 गीगावाट क्षमता के साथ देश की पांचवीं सबसे बड़ी थर्मल पावर उत्पादक कंपनी अब अपनी क्षमता को बढ़ाकर 20 गीगावाट करने की तैयारी में है। कंपनी भविष्य में न्यूक्लियर एनर्जी (परमाणु ऊर्जा) के अवसरों का भी मूल्यांकन कर रही है।
0।वेदांता लिमिटेड बनी रहेगी ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ की रीढ़




इन चार नई कंपनियों की लिस्टिंग के बाद भी ‘वेदांता लिमिटेड’ समूह की मुख्य पैरेंट कंपनी बनी रहेगी। इसके पास विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक और तीसरी सबसे बड़ी सिल्वर उत्पादक कंपनी ‘हिंदुस्तान जिंक’ की मजबूत आधारशिला है। इसके साथ ही यह देश की एकमात्र निकेल उत्पादक कंपनी है, जो इसके उत्पादन को बढ़ाकर 60,000 टन प्रतिवर्ष करने जा रही है। कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कंपनी 15 लाख टन क्षमता का फर्टिलाइज़र प्लांट भी विकसित कर रही है, जो भारत की दीर्घकालिक औद्योगिक आत्मनिर्भरता का मुख्य केंद्र होगी।


