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बड़ी खबर : कौन है सुशीला कार्की जो बनीं नेपाल की अंतरिम प्रमुख,बनारस से है इनका गहरा नाता,मोदी की भी है मुरीद

Nishant Manoj SharmaBy Nishant Manoj SharmaSeptember 11, 2025
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00 नेपाल की राजनीतिक उथल-पुथल में नया मोड़, पूर्व मुख्य न्यायाधीश को सौंपी गई जिम्मेदारी

00 कार्की की नियुक्ति पर बिफरे ओली ने लिया भारत को निशाने पर,पढ़िए… क्यों कहा “भारत है इसके पीछे”

TTN डेस्क

काठमांडू, 11 सितंबर 2025: नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया है, जहां पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति देश में चल रहे राजनीतिक संकट के बीच की गई है, जहां संसद भंग होने और नई सरकार गठन की प्रक्रिया लंबित है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने कार्की को संवैधानिक व्यवस्था के तहत अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंपा है, जो अगले चुनावों तक देश का संचालन करेंगी।
सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं, जिन्होंने 2015 से 2016 तक यह पद संभाला। वे कानून की प्रमुख विशेषज्ञ मानी जाती हैं और नेपाल के न्यायिक इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं। उनकी नियुक्ति को विपक्षी दलों ने स्वागत योग्य बताया है, लेकिन सत्तारूढ़ गठबंधन ने इसे संविधान का उल्लंघन करार दिया है।

0 बनारस से गहरा जुड़ाव

अध्ययन और सांस्कृतिक जुड़ाव
सुशीला कार्की का भारत के पवित्र शहर वाराणसी (बनारस) से विशेष संबंध रहा है। उन्होंने अपनी कानूनी शिक्षा के दौरान भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों में अध्ययन किया, जिसमें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) का नाम प्रमुखता से जुड़ा है। कार्की ने बीएचयू से विधि स्नातक (एलएलबी) की डिग्री प्राप्त की, जहां उन्होंने भारतीय संविधान और कानूनी सिद्धांतों पर गहन अध्ययन किया।
उनका बनारस से भावनात्मक जुड़ाव भी रहा है। कार्की ने कई साक्षात्कारों में बताया है कि बनारस की गंगा घाटी संस्कृति और हिंदू परंपराओं ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया। नेपाल में हिंदू बहुल देश होने के कारण, यह संबंध नेपाल-भारत सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक बनता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका यह भारतीय संबंध उनकी नीतियों में भारत-समर्थक दृष्टिकोण को मजबूत करेगा।

0 मोदी की तारीफ की : भारत के साथ बेहतर संबंधों की पक्षधर

सुशीला कार्की ने हमेशा भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की है। 2019 में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मोदी को “क्षेत्रीय शांति और विकास का प्रतीक” बताया था। कार्की ने कहा था कि मोदी की “नेबरहुड फर्स्ट” नीति नेपाल जैसे पड़ोसी देशों के लिए लाभकारी है।
वे भारत के साथ आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की कट्टर समर्थक रही हैं। पूर्व में न्यायिक भूमिका निभाते हुए उन्होंने नेपाल-भारत सीमा विवादों पर संतुलित रुख अपनाया, जो दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखता था। अंतरिम प्रमुख के रूप में उनकी भूमिका से विशेषज्ञों को उम्मीद है कि नेपाल में भारत-विरोधी तत्वों पर अंकुश लगेगा और द्विपक्षीय व्यापार व सहयोग बढ़ेगा।

0पूर्व पीएम ओली का भारत पर गंभीर आरोप: हस्तक्षेप का दावा

पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कार्की की नियुक्ति पर भारत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ओली, जो नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएन-यूएमएल) के प्रमुख हैं, ने कहा कि “भारत ने नेपाल की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप किया है।” उन्होंने दावा किया कि कार्की की नियुक्ति के पीछे नई दिल्ली का हाथ है, जो नेपाल को “उपनिवेश” बनाने की साजिश का हिस्सा है।
ओली ने 2024 के एक भाषण में भी भारत पर सीमा अतिक्रमण और आर्थिक दबाव का आरोप लगाया था, जिससे नेपाल सरकार पर दबाव पड़ा। उनकी टिप्पणियों ने नेपाल-भारत संबंधों में तनाव पैदा किया है।

0 विपक्ष ने ओली के बयानों को राजनीतिक स्टंट कहा पर कार्की के लिए बनेंगे सिरदर्द

विपक्ष ने ओली के बयानों को “राजनीतिक स्टंट” करार दिया, लेकिन यह कार्की के कार्यकाल के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।
यह नियुक्ति नेपाल की राजनीति को नई दिशा देगी, जहां भारत के साथ संबंधों का भविष्य तय होगा। अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का कहना है कि कार्की का नेतृत्व स्थिरता ला सकता है, लेकिन ओली जैसे नेताओं के विरोध से चुनौतियां बनी रहेंगी।

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