




00 बॉयलर ब्लास्ट मामला: सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर 350 से सीधे 590 MW किया गया था लोड; मजिस्ट्रियल जांच शुरू
TTN डेस्क
सक्ती/डभरा | छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए हृदयविदारक बॉयलर ब्लास्ट मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। औद्योगिक सुरक्षा विभाग की प्रारंभिक जांच में प्रबंधन की घोर लापरवाही उजागर होने के बाद डभरा थाने में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, प्लांट हेड देवेन्द्र पटेल सहित प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।
0 हादसे की मुख्य वजह: सुरक्षा पर भारी पड़ा ‘प्रोडक्शन प्रेशर’
जांच रिपोर्ट के अनुसार, प्लांट में बिजली उत्पादन बढ़ाने की होड़ में सुरक्षा मानकों की बलि चढ़ा दी गई। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त बॉयलर का लोड अचानक 350 मेगावाट से बढ़ाकर 590 मेगावाट कर दिया गया था। लोड में इस आकस्मिक वृद्धि से ईंधन और हवा का संतुलन बिगड़ गया, जिससे फर्नेस का दबाव बढ़ा और वाटर ट्यूब बॉयलर धमाके के साथ फट गया। चौंकाने वाली बात यह है कि तकनीकी खराबी की चेतावनी के बावजूद काम नहीं रोका गया था।
अपनों को खोने का गम: मृतकों में अधिकांश प्रवासी मजदूर
इस भयावह ब्लास्ट में अब तक 20 श्रमिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। हादसे में कुल 36 लोग प्रभावित हुए, जिनमें से 16 घायल अब भी रायगढ़ के जिंदल फोर्टिस, बालाजी मेट्रो और रायपुर के निजी अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच झुलस रहे हैं। मृतकों में छत्तीसगढ़ के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मजदूर शामिल हैं।
0 मुआवजे का मरहम: कंपनी देगी 35 लाख और नौकरी
हादसे के बाद बढ़ते जन आक्रोश और प्रशासन के दबाव के बीच मुआवजे की घोषणा की गई है:
*वेदांता प्रबंधन:* मृतक के परिजनों को ₹35 लाख की सहायता राशि और परिवार के एक सदस्य को नौकरी। गंभीर घायलों को ₹15 लाख एवं जब तक ठीक न हो तब तक सैलरी भी मिलेगी।
**सरकार:** राज्य सरकार की ओर से ₹5 लाख और केंद्र (PMNRF) से ₹2 लाख की सहायता।
0 चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने जताया दुख
> वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि, “पीड़ित परिवार मेरे अपने परिवार जैसे हैं। हादसे से मैं व्याकुल हूं और प्रभावितों की हर संभव मदद सुनिश्चित की जाएगी।”
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0 30 दिन में आएगी मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट
कलेक्टर ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं, जिसकी रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर सौंपी जानी है। श्रम मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी है, और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।


