
/मनोज यू शर्मा/
सबसे पहली बात—आज के दौर में ग्लैमर के नाम पर नग्नता, एक्शन की बजाय अत्यधिक हिंसा और पारिवारिक व सामाजिक मूल्यों की धज्जियां उड़ाने वाले भद्देपन से दूर, यदि आप एक बेहद साफ-सुथरी, भावनात्मक,रोचक और मनोरंजक फिल्म अपने परिवार के साथ देखना चाहते हैं, तो “दृश्यम – अंतिम भाग” को देखने से बिल्कुल मत चूकिएगा!
हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन क्राइम-थ्रिलर फ्रेंचाइजी के अंतिम भाग को एक ऐसा तार्किक और ठोस अंत देने में निर्देशक… कामयाब हुए है, जिसकी कल्पना कर पाना नामुमकिन था। रीमेक के दबाव से मुक्त होकर मेकर्स ने इस बार बिल्कुल नई और बेहद चालाक कहानी बुनी है जो दर्शकों को अंत तक अपनी सीट से बांधे रखती है।जाहिर है कि मैं कतई फिल्म की स्टोरी और क्लाइमेक्स की बात नहीं करूंगा जिससे कि आपका फिल्म देखने का मजा ही खत्म हो जाए।आइए जानते है कि क्या खास और क्यों देखे ये फिल्म….
0 पटकथा और संवाद ही अस्ल हीरो
फिल्म की कसी हुई पटकथा और सटीक डायलॉग ही इसके असली नायक हैं। कहानी का बहाव इतना सधा हुआ है कि एक भी पल फिजूल या खिंचा हुआ महसूस नहीं होता।
0 अजय देवगन का खामोश जादू
विजय सालगांवकर के रूप में अजय देवगन ने कमाल कर दिया है। पूरी फिल्म में वे बमुश्किल दो-तीन बार बड़े संवाद बोलते हैं, लेकिन उनकी आँखें सब कुछ कह जाती हैं। उनका यह ठहराव और मूक अभिनय रोंगटे खड़े कर देता है।
0 जयदीप अहलावत का ‘चौका’
एसपी राजवीर सिंह तोमर के नए किरदार में जयदीप अहलावत ने मौका मिलते ही चौका मारने वाले अंदाज में खुद को साबित किया है। उनका तीखा, आक्रामक और चालाक रवैया अजय देवगन के शांत स्वभाव के सामने एक जबर्दस्त टकराव पैदा करता है।
0 तब्बू और रजत कपूर का दर्द,लाचारी और गुस्सा
एक लाचार लेकिन बदले की आग में जल रही माँ के रूप में तब्बू का अभिनय अविश्वसनीय है। उनकी आँखों में बेटे को खोने का दर्द और विजय को सलाखों के पीछे देखने का गुस्सा साफ झलकता है।पति के किरदार में रजत कपूर ने उनका बखूबी साथ निभाया है, उनका नियंत्रित अभिनय कहानी को एक गहरा भावनात्मक आधार देता है।
0 श्रिया सरन और प्रकाश राज का प्रभाव
विजय की पत्नी के रूप में श्रिया सरन ने परिवार के लगातार बने रहने वाले डर और घबराहट को पूरी ईमानदारी से पर्दे पर उतारा है। वहीं नए एंट्री हुए कुशल अभिनेता प्रकाश राज अपने छोटे लेकिन बेहद महत्वपूर्ण रोल में स्क्रीन पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हैं।
0 धारदार एडिटिंग
फिल्म की एडिटिंग ने हर दृश्य की रोचकता को बढ़ा दिया है, खासकर सेकंड हाफ में। मध्यांतर के बाद संपादन की रफ्तार इतनी तेज और सटीक है कि दर्शकों को पलक झपकने का मौका भी नहीं मिलता।एक के साथ दूसरा सीन गूंथा चला जाता है।
मलयालम के ढीले ट्रैक से बिल्कुल अलग, हिंदी की दृश्यम 3 एक मास्टरपीस क्लोजर है। शानदार परफॉर्मेंस, लाजवाब एडिटिंग और दिमाग हिला देने वाले क्लाइमेक्स के साथ यह फिल्म थ्रिलर के शौकीनों के लिए ही नहीं सभी सिनेप्रेमियों के लिए एक मस्ट-वॉच (Must Watch) है।


