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देखिए वीडीओ…कोरबा : कोर्ट परिसर में लुहलुहान मिला शिक्षा कर्मी,ऊपरी मंजिल से खुद गिरा या पुलिस ने दिया धक्का..?


00 साजिश या संवेदनहीनता? न्याय के मंदिर में ‘वर्दी’ पर लगा संगीन आरोप!

00 शिक्षाकर्मी का दावा— “पुलिस ने गाली दी और छत से नीचे फेंका”

TTN डेस्क

कोरबा। जिला न्यायालय परिसर, जिसे न्याय का सबसे सुरक्षित स्तंभ माना जाता है, वहां गुरुवार को हुई एक खौफनाक घटना ने खाकी और कानून की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दीपका-कटघोरा शिक्षा विभाग में पदस्थ संदीप अग्रवाल कोर्ट की ऊपरी मंजिल से संदिग्ध हालात में नीचे गिरकर लहूलुहान हो गया। अस्पताल के बिस्तर पर न्याय के लिए तड़प रहे संदीप ने पुलिस पर जो आरोप लगाए हैं, वे किसी फिल्मी विलेन की क्रूरता से कम नहीं हैं।

0 बाबू की सूचना और ‘टी-शर्ट’ वाले सिपाहियों का कहर

एक रिटायर्ड फौजी के बेटे संदीप अग्रवाल का कहना है कि वे भ्रष्ट अधिकारियों की आंखों की किरकिरी बन चुके थे, इसलिए उन्हें झूठे दो साल पहले पॉक्सो एक्ट में फंसाया गया।यह मामला कटघोरा थाने में दर्ज है। गुरुवार को जब वे अपनी बेगुनाही के सबूत जुटाने के लिए RTI की जानकारी लेने कोर्ट पहुंचे, तो वहां मौजूद बाबू ने मांगी गई जानकारी देने के बजाय पुलिस को ‘टिप’ दे दी। संदीप का आरोप है कि कटघोरा थाने के दो सिपाही—एक मोटा और एक दुबला—सिविल ड्रेस में वहां पहुंचे। उन्होंने न केवल भद्दी गालियां दीं, बल्कि यह कहते हुए कि “हमें दो साल से परेशान कर रखा है,” उन्हें सीधे छत से नीचे धक्का दे दिया।

0 पुलिस पर लगा सवालिया निशान ?

संदीप ने व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए पूछा कि यदि वे खुद गिरे थे, तो उन्हें पकड़ने आई ‘बहादुर’ पुलिस उन्हें तड़पता छोड़कर मौके से भाग क्यों गई? मानवता की मिसाल वकीलों ने पेश की, जिन्होंने घायल को अस्पताल पहुंचाया। संदीप, जो कभी खुद ट्रैफिक वॉलेंटियर बनकर पुलिस की मदद करते थे, आज उसी पुलिस की बर्बरता का शिकार होने का दावा कर रहे हैं।

0 एएसपी ने कहा: “वह फरार आरोपी है, उसका कथन लेंगे फिर कार्यवाही करेंगे”

दूसरी ओर, एएसपी लखन पटले ने कहा है कि संदीप दो साल से फरार था और उस पर छात्राओं से छेड़छाड़ का संगीन जुर्म है। पुलिस का कहना है कि वे उसे पकड़ने गए थे। हालांकि, आरोपी के अस्पताल पहुँचने के बाद अब पुलिस ‘विवेचना’ और ‘कथन’ की बात कर रही है। फिलहाल संदीप को अस्पताल में निगरानी में रखा गया है,बाद में उसे गिरफ्तार किया जाएगा।

0 सवाल जो जवाब मांगते हैं

क्या पुलिस को किसी आरोपी को पकड़ने के बजाय उसे छत से गिराने का अधिकार है? क्या सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करने वाले को सीधे मौत के मुंह में धकेला जाएगा? इस हाई-वोल्टेज ड्रामे ने पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि क्या निष्पक्ष जांच होगी या फिर ‘वर्दी’ अपने ही दागों को धोने के लिए किसी नए मोहरे का इस्तेमाल करेगी।