“हलक में फंसी सांसे” ; हरियाणा की उचाना सीट के बीजेपी विधायक की पुनर्मतगणना न कराने की मांग हाइकोर्ट ने खारिज की

00 अत्री से 215 वोट से हारे कांग्रेस प्रत्याशी का मंगलवार को होगा बयान….क्या बदलेगा परिणाम…जानिए क्या है ये पूरा मामला…?

TTN Desk

पूर्व आईएएस बृजेन्द्र सिंह, जिन्होंने 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर उचाना सीट से चुनाव लड़ा था, 32 वोटों से हार गए थे। उन्होंने इस हार को चुनौती दी थी क्योंकि कुल 1,377 पोस्टल वोटों में से 215 को अमान्य घोषित कर दिया गया था। बृजेन्द्र सिंह को शेष 1,158 वैध वोटों में से 636 मिले थे।

0 वोटों की जांच और कानूनी चुनौती

बृजेन्द्र सिंह ने अमान्य घोषित किए गए 215 पोस्टल वोटों की फिर से जांच और पुनर्गणना की मांग की। मौजूदा भाजपा विधायक देवेंद्र अत्री ने इस जांच को रोकने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।

0 लोकतंत्र में चुनावी धोखाधड़ी

याचिका में चंडीगढ़ मेयर चुनाव का उदाहरण दिया गया है, जहां मतगणना अधिकारी खुद वोटों को अमान्य करते हुए पकड़ा गया था, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर परिणाम पलट गया।

वोट चोरी और सीट चोरी जैसी कुछ अन्य घटनाओं का भी जिक्र अभी चर्चा में है, जिसमें फर्जी वोटर बनाना, असली वोटर के नाम हटाना और बेईमान सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप शामिल है। बिहार और उत्तर प्रदेश में भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां हारे हुए उम्मीदवारों को विजयी घोषित किया गया।हालांकि ये मामले पंचायत या नगरीय निकाय चुनाव के रहे है।

0 इस हाइकोर्ट की तेजी सराहनीय

इस बात की सराहना की गई है कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में बहस एक साल के भीतर ही पूरी कर दी है, जबकि 2017 के गुजरात चुनाव में दायर कई याचिकाओं पर फैसला आने में पांच साल लग गए थे। बृजेन्द्र सिंह जीत के प्रति आश्वस्त हैं क्या इस मामले का फैसला लोकतंत्र के अपहरण और संगठित अपराध के एक और तरीके का पर्दाफाश कर सकता है,इस पर निगाहें टिकी हुई है। कल, 23 सितंबर को बृजेन्द्र सिंह की हाईकोर्ट में गवाही होगी और जल्द ही फैसला आने की उम्मीद है।