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महायुद्ध ; विशाखापत्तनम से लौट रहे ईरानी युद्धपोत को अमेरिका ने टॉरपीडो से उड़ाया; श्रीलंका के पास डूबा, भारी तबाही

00 द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी पनडुब्बी का पहला बड़ा हमला; 87 शव बरामद, 150 नौसैनिक लापता

TTN डेस्क

गॉल/कोलंबो । हिंद महासागर के शांत जल में बुधवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब ईरानी नौसेना का आधुनिक फ्रिगेट IRIS Dena भीषण हमले के बाद समुद्र में समा गया। यह युद्धपोत भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित फ्लीट रिव्यू में शामिल होकर वापस ईरान लौट रहा था।

श्रीलंका के दक्षिणी तट (गॉल) से करीब 40-75 किलोमीटर दूर अमेरिकी पनडुब्बी ने इसे अपना निशाना बनाया।

0 ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’: समंदर में छिड़ा महायुद्ध

अमेरिकी रक्षा मंत्री पिट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि करते हुए दुनिया को चौंका दिया है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो का सटीक प्रहार कर ईरानी जहाज को डुबो दिया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह अपनी तरह का पहला वाकया है जब अमेरिका ने किसी दुश्मन जहाज पर टॉरपीडो हमला किया है। यह कार्रवाई अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का हिस्सा है।

0 बचाव कार्य और हृदयविदारक मंजर

जैसे ही हमले की खबर मिली, श्रीलंकाई नौसेना ने तत्काल बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
* बचाव: अब तक 32 घायल ईरानी सैनिकों को सुरक्षित निकालकर गॉल के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
* हताहत: घटनास्थल से अब तक 80 से 87 शव बरामद किए जा चुके हैं।
* लापता: करीब 150 नौसैनिक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में गोताखोर और गश्ती जहाज जुटे हुए हैं।

समुद्र की सतह पर चारों ओर जहाज का मलबा और भारी मात्रा में तेल का रिसाव (Oil Spill) देखा जा रहा है, जिससे समुद्री पर्यावरण को भी खतरा पैदा हो गया है।

0 श्रीलंका की मानवीय पहल

अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ा जहाँ एक ओर अमेरिका ने हमले का खुलेआम दावा किया है, वहीं श्रीलंका सरकार ने फिलहाल किसी भी सैन्य टिप्पणी से परहेज किया है। श्रीलंकाई अधिकारियों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता केवल मानवीय आधार पर लोगों की जान बचाना है। विशाखापत्तनम से लौटते समय हुए इस हमले ने अब दक्षिण एशिया के समुद्री रास्तों पर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

> “हमने अपने दुश्मन को स्पष्ट संदेश दे दिया है। अमेरिकी नौसेना की क्षमता पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए।” > — पिट हेगसेथ, रक्षा मंत्री, अमेरिका
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