


TTN डेस्क
प्रयागराज: माघ मेले के सबसे पवित्र मौनी अमावस्या स्नान के दिन रविवार कोसंगम नोज पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का भव्य जुलूस (पालकी/रथ) पुलिस प्रशासन द्वारा बीच रास्ते में रोक दिया गया।
शंकराचार्य के शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसमें बुजुर्ग संतों, वेदपाठी बालकों को धकियाने और पीटने के गंभीर आरोप लगे हैं। कुछ शिष्यों को हिरासत में भी लिया गया। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि पुलिस और अफसरों ने बदसलूकी की, संतों पर हमला किया, जिसके कारण उन्होंने संगम में स्नान करने से इनकार कर दिया और बिना स्नान वापस लौट गए।
0 क्या कह रहा प्रशासन
भीड़ के दबाव और सुरक्षा कारणों से रथ/पालकी को आगे बढ़ने से रोका गया था। उन्हें पैदल जाने का अनुरोध किया गया, लेकिन समर्थक नहीं माने, जिससे झड़प हुई।
0 ये कैसी कथनी….
यह घटना तब हुई जब एक तरफ सरकार संत-महात्माओं का सम्मान करने का दावा करती है, वहीं माघ मेले में ‘सतुआ बाबा’ (जगतगुरु महामंडलेश्वर संतोष दास) अपनी 3 करोड़ रुपये की लैंड रोवर डिफेंडर और अन्य लग्जरी वाहनों के काफिले के साथ खुलेआम घूम रहे हैं। सतुआ बाबा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का करीबी बताया जाता है।
0 भेदभाव से नाराजगी
शंकराचार्य के समर्थकों में रोष है कि एक तरफ संतों का अपमान और उत्पीड़न, दूसरी तरफ चुनिंदा संतों को विशेष सुविधाएं। इस घटना ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है।


