बालको की पैरेंट कंपनी ‘वेदांता’ से बड़ी खबर : मई तक अस्तित्व में आएंगी 4 नई कंपनियां, शेयर बाजार में होंगी सूचीबद्ध

II मनोज यू शर्मा Il

कोरबा। तेल से लेकर धातु तक के विशाल कारोबार का संचालन करने वाले अनिल अग्रवाल के समूह ‘वेदांता लिमिटेड’ ने अपने कारोबार को अलग-अलग हिस्सों में बांटने (विविलय) की तैयारी पूरी कर ली है। भारत एल्युमीनियम कंपनी (BALCO) की मूल कंपनी वेदांता का लक्ष्य आगामी मई के मध्य तक अपनी चार नई डीमर्ज्ड इकाइयों को भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध करना है।

0 1 अप्रैल से प्रभावी होगा नया ढांचा

वेदांता लिमिटेड के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) अजय गोयल ने एक प्रमुख बिजनेस न्यूज प्लेटफॉर्म से चर्चा में स्पष्ट किया कि कंपनी 1 अप्रैल से इस विविलय (डिमर्जर) को प्रभावी बनाने का इरादा रखती है। कानूनी औपचारिकताओं में लगभग 4 से 6 सप्ताह का समय लगेगा, जिसके बाद मई के मध्य तक समूह की कुल पांच कंपनियां बाजार में सक्रिय हो जाएंगी।
विभाजन के तहत निम्नलिखित व्यवसायों को अलग किया जाएगा:

* एल्युमीनियम (जिसमें बालको शामिल है)
* तेल और गैस
* इस्पात और लौह धातु
* बिजली (पावर)
जबकि बेस मेटल (आधार धातु) इकाई मूल कंपनी के साथ ही रहेगी।

0 बालको के इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा मोड़

बालको के प्रबंधन और ढांचे के लिहाज से यह एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है।

* स्थापना (1965): सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के रूप में बालको की नींव पड़ी।

* विनिवेश (2001): स्थापना के 36 साल बाद बालको में पहला बड़ा बदलाव 2001 में आया। तब केंद्र सरकार ने विनिवेश प्रक्रिया के तहत 551.5 करोड़ रुपये में अनिल अग्रवाल की कंपनी स्टरलाइट इंडस्ट्रीज (अब वेदांता) को 51 प्रतिशत शेयर बेचे थे। इसी के साथ बालको के प्रबंधन और संचालन का अधिकार वेदांता के अधीन हो गया।

* वर्तमान स्थिति: आज भी बालको की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी केंद्र सरकार के पास सुरक्षित है। अब 2026 में होने वाला यह पुनर्गठन बालको के भविष्य के लिए एक नई दिशा तय करेगा।

0 क्यों लिया गया यह फैसला?

यह योजना मुख्य रूप से कर्ज के बोझ को कम करने और प्रत्येक व्यवसाय के लिए अलग से पूंजी जुटाने के उद्देश्य से बनाई गई है। हालांकि, शुक्रवार को वैश्विक बाजार में कीमतों की गिरावट के चलते वेदांता के शेयरों में 5% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा एल्युमीनियम आयात पर टैरिफ बढ़ाकर 50% किए जाने के सवाल पर कंपनी ने साफ किया कि इसका असर नगण्य होगा, क्योंकि भारत के भीतर ही एल्युमीनियम की मांग बेहद मजबूत है।