


00 ओडिशा के रायगढ़ा जिले के कल्याणसिंहपुर थाना क्षेत्र के कंजामझिरा (कंजामजोड़ी) गांव में 9 जुलाई, 2025 को एक प्रेमी जोड़े को अमानवीय और क्रूर सजा दी गई।
TTN Desk
यह घटना एक ही गोत्र में प्रेम विवाह करने के कारण हुई, जो स्थानीय आदिवासी परंपराओं में निषिद्ध माना जाता है। घटना का वीडियो 11 जुलाई, 2025 को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद व्यापक आक्रोश फैला, जिसने मानवता को शर्मसार करने वाली इस क्रूरता को उजागर किया।
0 और फिर ऐसे दी गई सजा
युवक और युवती, जो हाल ही में प्रेम विवाह के बंधन में बंधे थे, एक ही गोत्र से थे, और युवक को युवती परस्पर संबंधी थे। स्थानीय परंपराओं में इसे अनैतिक माना जाता है। गांव वालों ने एक अनौपचारिक पंचायत बुलाई और जोड़े को दंडित करने का फैसला किया। सजा के तौर पर…
बैलों की तरह हल में बांधा : जोड़े को बांस और लकड़ी से बने हल में रस्सियों से बांधकर खेत में जबरन हल खींचने के लिए मजबूर किया गया। यह सार्वजनिक अपमान गांव वालों के सामने हुआ।
शारीरिक यातना : हल खींचते समय जोड़े को डंडों से पीटा गया। कुछ ग्रामीणों ने इस क्रूरता को मोबाइल में रिकॉर्ड किया और कुछ ने इसे प्रोत्साहित किया।
शुद्धिकरण और निष्कासन : इसके बाद जोड़े को गांव के मंदिर में ले जाकर “शुद्धिकरण” अनुष्ठान किया गया, ताकि उनके “पाप” को मिटाया जा सके। अंत में, उन्हें गांव से निष्कासित कर दिया गया।
0 वीडीओ वायरल होने के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
11 जुलाई को वीडियो वायरल होने के बाद रायगढ़ा पुलिस सक्रिय हुई। पुलिस अधीक्षक एस. स्वाति कुमार ने पुष्टि की कि कल्याणसिंहपुर पुलिस ने गांव में जांच शुरू कर दी है। प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है, और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) 12 जुलाई, 2025 को गांव का दौरा करने वाले हैं। जोड़े की वर्तमान स्थिति और ठिकाना अज्ञात है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता है।
0 रूढ़िवादी मानसिकता में होने वाले अन्याय से कब होंगे मुक्त ?
कंजामझिरा गांव की इस घटना ने जनमानस को झकझोर दिया है। यह न केवल एक प्रेमी जोड़े के साथ हुए अन्याय की कहानी है, बल्कि यह समाज में व्याप्त रूढ़ियों और कानून के शासन की कमी को भी उजागर करती है। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि आधुनिक भारत में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक परंपराओं के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए।


