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देश में मात्र 25 दिन का तेल शेष: इजराइल-ईरान युद्ध ने बढ़ाई भारत की टेंशन

00 होर्मुज स्ट्रेट में तनाव से 50% सप्लाई पर संकट, वैकल्पिक सप्लायर्स की तलाश में जुटी केंद्र सरकार

TTN डेस्क

नई दिल्ली | इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते भीषण संघर्ष का सीधा असर अब भारत की रसोई और सड़कों पर पड़ता दिखाई दे रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, युद्ध के कारण सप्लाई चेन बाधित होने से भारत के पास कच्चे और रिफाइंड तेल का कमर्शियल स्टॉक मात्र 25 दिनों का बचा है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।

0 होर्मुज स्ट्रेट: भारत की दुखती रग

भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से आधा हिस्सा पश्चिम एशिया के उसी रास्ते से आता है जिसे ‘होर्मुज स्ट्रेट’ कहा जाता है। ईरान द्वारा इस रास्ते को बंद करने की धमकी ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। यदि यह मार्ग पूरी तरह बंद होता है, तो भारत की 50% तेल सप्लाई ठप हो सकती है।

0 प्लान-बी पर काम शुरू: रूस और अफ्रीका से उम्मीद

संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने ‘एनर्जी सिक्योरिटी’ के लिए मोर्चा संभाल लिया है:

* रूसी तेल पर जोर: सरकार रूस से कच्चे तेल के आयात को बढ़ाने और रूसी तेल टैंकरों को सीधे खरीदने की योजना पर काम कर रही है।

* नए विकल्प: अफ्रीकी देशों से भी वैकल्पिक सप्लाई के लिए बातचीत शुरू कर दी गई है।

* स्ट्रैटेजिक रिजर्व: कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि देश के रणनीतिक भंडारों (Strategic Reserves) को मिला लिया जाए, तो स्टॉक 40-50 दिनों तक चल सकता है, लेकिन कमर्शियल स्टॉक का कम होना बड़ी चुनौती है।

0 80 डॉलर पहुंचा क्रूड, 100 के पार जाने का डर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचा, तो कीमतें जल्द ही 100 डॉलर का आंकड़ा पार कर सकती हैं।

> राहत की खबर: अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद सरकार घरेलू स्तर पर तेल की कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही है, ताकि आम जनता पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ न पड़े।
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