देखिए वीडीओ…व्यवस्था की बलि चढ़ता अन्नदाता: कोरबा में टोकन न कटने से परेशान किसान ने पीया जहर, अस्पताल में भर्ती

TTN डेस्क

​कोरबा: छत्तीसगढ़ में नवंबर से जारी धान खरीदी अभियान अब किसानों के लिए ‘जी का जंजाल’ बनता जा रहा है। कोरबा जिले के नॉनबिर्रा धान खरीदी केंद्र में व्याप्त अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही ने एक और अन्नदाता को मौत के मुहाने पर धकेल दिया है। डेढ़ महीने से टोकन के लिए भटक रहे ग्राम कोरबी धतूरा निवासी किसान सुमेर सिंह गोंड ने सरकारी तंत्र की प्रताड़ना से तंग आकर कीटनाशक दवा पी ली।

0 ​डेढ़ महीने की भागदौड़ और मानसिक प्रताड़ना

​पीड़ित किसान की पत्नी मुकुंद बाई ने अपनी आपबीती बताई है कि किसान सुमेर सिंह के पास 3 एकड़ 75 डिसमिल जमीन है। किसान का आरोप है कि पंजीयन होने के बावजूद केंद्र में उसका टोकन नहीं काटा जा रहा था। पिछले डेढ़ महीने से उसे कभी रकबा घटाने तो कभी अन्य तकनीकी बहाने बनाकर केंद्र से लौटाया जा रहा था। इसी मानसिक दबाव और फसल न बिक पाने के डर से किसान ने यह खौफनाक कदम उठाया। फिलहाल किसान का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है।

0 ​अस्पताल पहुँची सांसद: सरकार पर साधा निशाना

​घटना की सूचना मिलते ही कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत जिला अस्पताल पहुँचीं और पीड़ित किसान का हालचाल जाना। किसान की आपबीती सुनने के बाद सांसद ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला।उन्होंने कहा कि ​”छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आज प्रदेश का आदिवासी किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। सरकारी केंद्रों पर अव्यवस्था का आलम है, न समय पर टोकन मिल रहा है और न ही किसानों की सुनवाई हो रही है।”

0 ​बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?

​प्रदेश भर में रकबा घटाने और टोकन वितरण में हो रही धांधली से किसान आक्रोशित हैं। कोरबा की इस घटना ने साफ कर दिया है कि कागजी दावों और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। क्या प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर कोई ठोस कार्रवाई करेगा, या किसान इसी तरह व्यवस्था की भेंट चढ़ते रहेंगे?