

00।सुसाइड नोट की जगह सनत ने बनाया वीडियो: पुलिस के खौफ में गैरेज मिस्त्री ने फांसी लगाकर दी जान
TTN डेस्क
कोरबा। “घर वालों की तरफ से कोई टेंशन नहीं है… मुझे पंतोरा चौकी के पुलिस वाले गाली-गलौज कर रहे हैं। जब मैंने कुछ किया ही नहीं, तो इतना गाली क्यों दी? वहां जाऊंगा तो फिर मेरे साथ क्या करेंगे?”
यह उस बदनसीब युवक के आखिरी शब्द थे, जिसने खाकी के कथित धमकी और प्रताड़ना से डरकर मौत को गले लगा लिया। कोरबा के उरगा थाना क्षेत्र में हुई इस घटना ने एक बार फिर निचले स्तर के पुलिसकर्मियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
0 वीडियो में छलका बेगुनाही का दर्द
अकलतरा निवासी सनत कश्यप (25) ने फंदे पर झूलने से पहले मोबाइल पर अपना दर्द रिकॉर्ड किया। वीडियो में वह साफ कह रहा है कि उसके रूम पार्टनर धीरेंद्र पाटले के किसी युवती को भगाने के मामले में उसका कोई हाथ नहीं है। बावजूद इसके, जांजगीर-चाम्पा जिले की पंतोरा पुलिस चौकी से आए एक फोन कॉल और उसमें दी गई गालियों व धमकियों ने उसे इस कदर तोड़ दिया कि उसने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
0 डर की दहलीज: पूछताछ के नाम पर धमकी ,गालियां
घटना शुक्रवार शाम करीब 6 बजे की है। सनत कोरबा में अशोक लीलैंड कंपनी में मिस्त्री का काम करता था। जैसे ही उसे पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया, वह इस कदर भयभीत हो गया कि उसे लगा पुलिस उसे झूठे केस में फंसा देगी या बेरहमी से पीटेगी। इसी आशंका और तनाव में उसने सीलिंग पंखे के सहारे फांसी लगा ली। उरगा पुलिस ने शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
0 परिजनों का कोहराम, पुलिस पर उठे सवाल
चार भाइयों में सबसे छोटे सनत की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस की बेवजह प्रताड़ना ने उनके बेटे की जान ली है। अब देखना यह है कि क्या उच्चाधिकारी उस आरक्षक पर कार्रवाई करेंगे, जिसका जिक्र मृतक ने अपने आखिरी वीडियो में किया है?समाचार लिखे जाने तक पुलिस की और से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
0 विशेष अपील: आत्मघाती कदम समाधान नहीं, संघर्ष का रास्ता चुनें
इस दुखद घटना के बीच हम अपने सभी पाठकों से यह विनम्र अपील करता है कि आत्महत्या किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। जीवन में परिस्थितियां कभी-कभी अत्यंत कठिन और तनावपूर्ण हो सकती हैं, विशेषकर जब मामला पुलिसिया कार्रवाई या किसी डर से जुड़ा हो, लेकिन ऐसे समय में धैर्य खोने के बजाय अपनों से बात करना और कानूनी विशेषज्ञों या वरिष्ठ अधिकारियों की मदद लेना ही सही रास्ता है। याद रखें, आपका एक गलत कदम आपके पीछे पूरे परिवार को उम्र भर का असहनीय दर्द दे जाता है। समस्या कितनी भी बड़ी क्यों न हो, साहस और सूझबूझ से उसका सामना करें; जिंदगी अनमोल है, इसे अपनों के लिए सुरक्षित रखें।


