TTN डेस्क 
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) में रीएजेंट खरीदी से जुड़े करीब 400 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के मामले में दो वरिष्ठ अधिकारियों की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। यह फैसला घोटाले में शामिल अफसरों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि यह संगठित आर्थिक अपराध का मामला है, जिसमें जमानत देकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।
CGMSC के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. अनिल परसाई ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी, लेकिन चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि घोटाले में उनकी संलिप्तता प्रथम दृष्टया साबित हो रही है।
0।असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर बसंत कौशिक की जमानत भी खारिज
तत्कालीन असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर (वर्तमान में महाप्रबंधक पद पर) बसंत कौशिक की याचिका पर भी सुनवाई हुई। कोर्ट ने उनके बचाव के तर्कों को खारिज करते हुए जमानत अस्वीकार कर दी। बसंत कौशिक पहले भी स्पेशल कोर्ट से जमानत हासिल करने में नाकाम रहे थे।
0 मुख्य आरोपी शशांक चोपड़ा की जमानत सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई
घोटाले के कथित मास्टरमाइंड और मोक्षित कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर 2025 को खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने इस फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य आरोपी को राहत न मिलने के कारण सह-आरोपियों को भी जमानत नहीं दी जा सकती। शशांक चोपड़ा पर निविदा प्रक्रिया में हेराफेरी और अधिकारियों से सांठगांठ के गंभीर आरोप हैं।
घोटाले का अनुमानित रकम : यह घोटाला करीब 400 करोड़ रुपये का माना जा रहा है, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में 341 करोड़ या 411 करोड़ तक का उल्लेख है। 2021 में स्वास्थ्य विभाग की ‘हमर लैब’ योजना के तहत रीएजेंट और मेडिकल उपकरणों की अनावश्यक खरीदी की गई, जिसमें निर्धारित दरों से कई गुना अधिक भुगतान किया गया।
जांच एजेंसियां: मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED), राज्य की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) द्वारा संयुक्त रूप से जांचा जा रहा है। EOW ने पहले ही 6 अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए चालान पेश कर चुकी है।
0 यूं किया गया करोड़ों का गोलमाल
यह मामला 2021 में सामने आया, जब CGMSC ने बिना बजट स्वीकृति के रीएजेंट (रासायनिक परीक्षण किट्स) और उपकरणों की खरीदी की। उदाहरण के लिए, 8 रुपये का EDTA ट्यूब 2,352 रुपये में और 5 लाख की CBS मशीन 17 लाख में खरीदी गई। कई रीएजेंट एक्सपायर हो चुके थे, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा। मोक्षित कॉर्पोरेशन, रिकॉर्ड्स एंड मेडिकेयर सिस्टम, श्री शारदा इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों पर पूल टेंडरिंग का आरोप है। अब तक कई अधिकारी और कारोबारी गिरफ्तार हो चुके हैं, और जांच जारी है।
यह फैसला घोटाले की जांच को तेज करने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ऐसे मामलों में ट्रायल कोर्ट में तर्क पेश किए जाएं, न कि जमानत पर जोर दिया जाए। अधिक अपडेट के लिए न्यूज चैनलों पर नजर रखें।


