इतिहास में पहली बार: सुप्रीम कोर्ट में खुद जज के सामने डटीं मुख्यमंत्री, ममता ने कहा- ‘बंगाल को बनाया जा रहा निशाना’

TTN डेस्क

नई दिल्ली: देश के न्यायिक इतिहास में बुधवार को एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वकील की भूमिका में नजर आईं। वह सुप्रीम कोर्ट में बहस करने वाली देश की पहली मौजूदा मुख्यमंत्री बन गई हैं। मतदाता सूची में विसंगतियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उन्होंने प्रधान न्यायाधीश की पीठ के सामने अपना पक्ष रखा।

0 सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को थमाया नोटिस

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने ममता बनर्जी की दलीलों को गंभीरता से सुना। कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को नोटिस जारी कर 9 फरवरी तक जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि “पात्र व्यक्तियों का नाम मतदाता सूची में होना ही चाहिए।”

0 कोर्ट ने कहा- 5 नहीं 15 मिनट बोलिए; ममता भावुक हुईं

सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने व्यक्तिगत रूप से पक्ष रखने के लिए 5 मिनट का समय मांगा था, जिस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “हम आपको 5 नहीं बल्कि 15 मिनट देंगे।” अपनी बात रखते हुए ममता बनर्जी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, “मैं एक साधारण परिवार से हूं और बंधुआ मजदूर की तरह काम कर रही हूं। वकीलों के जरिए पक्ष रखने के बाद भी हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा है, इसलिए मुझे खुद आना पड़ा।”

0 ‘व्हाट्सएप आयोग’ कहकर चुनाव आयोग पर साधा निशाना

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उसे ‘व्हाट्सएप आयोग’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के वरिष्ठ अधिकारी निचले स्तर के कर्मचारियों को व्हाट्सएप पर निर्देश भेज रहे हैं। उन्होंने पूछा कि सिर्फ पश्चिम बंगाल को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है और असम जैसे राज्यों में यही मापदंड क्यों नहीं अपनाए जा रहे?

0 सुप्रीम कोर्ट की अधिकारियों को नसीहत

पीठ ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) को संवेदनशील होना चाहिए। नाम की वर्तनी (Spelling) जैसी छोटी-मोटी गलतियों के आधार पर नोटिस जारी करना या नाम काटना सही नहीं है। ममता बनर्जी ने अंत में लोकतंत्र बचाने की गुहार लगाते हुए पीठ का आभार व्यक्त किया।