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TTN exclusive : वेदांता को इसी साल पांच अलग अलग कंपनियों में बांटने का लक्ष्य,17 सितंबर को सुनवाई

“मनोज यू शर्मा”

00 कोरबा स्थित बालकों और झारसुगुड़ा स्थित वेदांता एल्यूमिनियम को ध्यान में रखते हुए यह एक बड़ा डेवलेपमेंट है।एल्यूमिनियम सेक्टर की स्वतंत्र कंपनी वेदांता एल्यूमिनियम बनने के बाद छत्तीसगढ़ और उड़ीसा में नई परियोजनाओं को गति मिलेगी।

00 वेदांता समूह का एल्यूमिनियम कारोबार दरअसल छत्तीसगढ़ और उड़ीसा में ही स्थित है।बालकों की क्षमता विस्तार के साथ साथ उड़ीसा के रायगढ़ा के निकट भी समूह एक बड़ा एल्यूमिनियम कारखाना स्थापित करने जा रहा है।

00 कुछ अरसा पहले ही उड़ीसा के मुख्यमंत्री और अनिल अग्रवाल की मौजूदगी में उड़ीसा सरकार और वेदांता के बीच एक लाख करोड़ के निवेश का एमओयू हुआ है।

TTN Desk

अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता ने एक बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (TSPL) और चीनी कंपनी शेनडांग इलेक्ट्रिक पावर कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन ( sepco )के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को सुलझा लिया है. यह विवाद 3×660 मेगावॉट के थर्मल पावर प्रोजेक्ट से जुड़ा था, जिसके चलते SEPCO ने वेदांता की डीमर्जर योजना को चुनौती दी थी.

0 ₹1,251 करोड़ का विवाद सुलझा

वेदांता ने 11 सितंबर 2025 को SEPCO के साथ एक सेटलमेंट एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं. इस समझौते के तहत, दोनों पक्षों ने सभी क्लेम और काउंटर-क्लेम का पूरी तरह से निपटारा कर दिया है. इसके साथ ही, इस विवाद से जुड़ी सभी लंबित मध की कार्यवाही को भी वापस ले लिया जाएगा. इस समझौते के बाद, SEPCO को TSPL से बकाया ₹1,251 करोड़ का विवाद समाप्त हो गया है.

0 डीमर्जर योजना को मिली गति

मार्च 2025 में, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच ने वेदांता की डीमर्जर योजना को ‘पर्याप्त जानकारी नहीं देने’ के कारण खारिज कर दिया था. चूंकि SEPCO का बकाया भी इस योजना को चुनौती देने का एक प्रमुख कारण था, इसलिए इस समझौते से डीमर्जर की राह आसान हो गई है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होनी है, जिसमें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है.

0 क्या है वेदांता की डीमर्जर योजना ?

वेदांता ग्रुप ने अपने कारोबार को पांच अलग-अलग कंपनियों में बांटने का फैसला किया है. इन कंपनियों का फोकस एल्युमिनियम, बेस मेटल्स, आयरन और स्टील, ऑयल एंड गैस और पावर जनरेशन जैसे अलग-अलग क्षेत्रों पर होगा. डीमर्जर के बाद ये सभी कंपनियां स्वतंत्र रूप से काम करेंगी और शेयर बाजार में अलग-अलग सूचीबद्ध होंगी. इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक व्यवसाय को अपने-अपने सेक्टर में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए अधिक स्वतंत्रता और गति देना है.