
00 वेदांता ने अदानी को जयप्रकाश एसोसिएट्स देने के खिलाफ NCLT में दायर की याचिका
फोटो : AI निर्मित
नई दिल्ली (12 फरवरी 2026): अनिल अग्रवाल की वेदांता लिमिटेड ने गौतम अदानी की अदानी एंटरप्राइजेज को दिवालिया जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) की रेजोल्यूशन योजना को मंजूरी देने के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में याचिका दायर की है। वेदांता का दावा है कि उसकी बोली कुल मूल्य में सबसे ज्यादा थी, फिर भी ऋणदाताओं ने अदानी की योजना को चुना। यह मामला अब इलाहाबाद बेंच में सुनवाई के लिए लंबित है।
0 क्यों चुनौती दी वेदांता ने?
वेदांता ने सितंबर 2025 में चैलेंज प्रोसेस में सबसे ऊंची बोली लगाई थी – लगभग 17,000 करोड़ रुपये (एनपीवी में करीब 12,500 करोड़)। इसमें 3,770 करोड़ upfront और बाकी 5 साल में चुकाने का प्रस्ताव था। कंपनी का कहना है कि IBC के तहत मूल्यांकन (highest value) को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी।
लेकिन नवंबर 2025 में कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) ने अदानी की योजना को 90% से ज्यादा वोटों से मंजूरी दी। अदानी की योजना 13,500-15,000 करोड़ की है, लेकिन इसमें upfront भुगतान ज्यादा और कुल समयसीमा सिर्फ 1.5-2 साल है। बैंक (ज्यादातर लेनदार) जल्दी रिकवरी चाहते थे, इसलिए उन्होंने अदानी को तरजीह दी – भले ही कुल मूल्य में वेदांता आगे थी।
0 अदानी को क्यों मिली मंजूरी, जबकि वेदांता की बोली ज्यादा?
Upfront पेमेंट का फायदा: अदानी ने ज्यादा तत्काल राशि देने का वादा किया, जो बैंक/ऋणदाताओं के लिए बेहतर रिकवरी सुनिश्चित करता है। वेदांता की 5 साल की लंबी अवधि से रिस्क ज्यादा लगता था।
CoC की कमर्शियल समझदारी: IBC कानून में CoC (कंसोर्टियम ऑफ क्रेडिटर्स) को व्यावसायिक निर्णय लेने की छूट है। वे कुल मूल्य से ज्यादा जल्दी और सुरक्षित रिकवरी को प्राथमिकता दे सकते हैं।
एनपीवी में अंतर: अदानी की योजना NPV में वेदांता से करीब 500 करोड़ कम थी, लेकिन upfront ज्यादा होने से स्कोरिंग में आगे रही।
0 आगे क्या होगा?
NCLT अगर वेदांता की याचिका मानेगी, तो अदानी की योजना रद्द हो सकती है या प्रक्रिया में नई बोली/पुनर्विचार हो सकता है – इससे देरी होगी।
अदानी को JAL मिलने पर सीमेंट, रियल एस्टेट, पावर और इंफ्रा में बड़ा फायदा मिलेगा, साथ ही नोएडा-ग्रेटर नोएडा में 3,985 एकड़ जमीन। जयप्रकाश ग्रुप के होमबायर्स और अन्य हितधारकों के लिए यह प्रक्रिया अहम है, क्योंकि कई प्रोजेक्ट्स सालों से अटके हैं।
यह टकराव दो बड़े बिजनेस ग्रुप्स – अदानी और वेदांता – की ताकत का प्रदर्शन है। NCLT का फैसला आने वाले दिनों में JAL की किस्मत तय करेगा।


