इस्तीफे से कोंग्रेस में खलबली: “आप ब्लॉक अध्यक्ष से प्रदेश अध्यक्ष बन गए, मैं 11 साल से सचिव ही रह गई”

00 पीसीसी सचिव निवेदिता चटर्जी ने दीपक बैज को भेजा इस्तीफा; पार्टी में उपेक्षा और भेदभाव का लगाया गंभीर आरोप

TTN डेस्क

रायपुर | 07 फरवरी 2026
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में अंतर्कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की सचिव डॉ. निवेदिता चटर्जी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज को भेजे गए अपने पत्र में उन्होंने पार्टी के भीतर व्याप्त भेदभाव, वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी और टिकट वितरण में हुई गड़बड़ियों पर तीखे प्रहार किए हैं।

0 11 साल का लंबा इंतजार और ‘पद उन्नति’ का दर्द

डॉ. निवेदिता ने अपने पत्र में अध्यक्ष दीपक बैज पर सीधा तंज कसते हुए लिखा कि उनके सामने ही कई लोग ब्लॉक अध्यक्ष से लेकर विधायक, सांसद और अब प्रदेश अध्यक्ष के पद तक पहुँच गए, लेकिन वे 2014 से अब तक केवल सचिव पद पर ही स्थिर रहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पार्टी में केवल कुछ वर्गों (SC, ST, OBC) को ही जिम्मेदारी दी जाती है और जनरल कैटेगरी के अनुभवी कार्यकर्ताओं के लिए पदोन्नति का कोई स्थान नहीं है?

0 पारिवारिक संकट में नहीं मिला साथ

इस्तीफे में निवेदिता ने बेहद भावुक होते हुए बताया कि पिछला एक साल उनके लिए अत्यंत कठिन था, क्योंकि उनकी मां गंभीर कैंसर से पीड़ित थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कठिन समय में किसी भी कांग्रेसी नेता ने उनकी सुध नहीं ली और न ही कोई सहयोग किया। वे पार्टी के कार्यक्रमों और प्रचार के लिए अकेले ही मोर्चा संभालती रहीं, जबकि पार्टी नेतृत्व उनके प्रति पूरी तरह उदासीन रहा।

0 टिकट वितरण और हार पर उठाए सवाल

निवेदिता चटर्जी ने पार्टी की चुनावी रणनीति पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि:

* रायपुर दक्षिण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर गलत लोगों को टिकट दिया गया, जिसके कारण पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।
* वार्ड पार्षद की टिकट उनकी ही कॉलोनी में एक नए सदस्य को दे दी गई, जबकि पार्टी के पुराने पदाधिकारियों की अनदेखी की गई।
* उन्होंने पंकज विक्रम जैसे वार्डों की हार का जिक्र करते हुए पूछा कि आखिर 2014 से मेहनत करने वाले सचिव आज सब क्यों हार रहे हैं?

0 “साधारण कार्यकर्ता रहना ही अच्छा”

अंत में उन्होंने क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि जब पार्टी में पद की गरिमा और जिम्मेदारी का कोई मूल्य नहीं है, तो वे साधारण कार्यकर्ता के रूप में रहना ही बेहतर समझती हैं। उन्होंने दीपक बैज से अपना इस्तीफा तत्काल मंजूर करने का आग्रह किया है।