
TTN डेस्क
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल की शनिवार को जेल से रिहाई के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह उस वक्त बदहाली में बदल गया, जब भीड़ ने कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ अभद्रता और धक्का-मुक्की की। इस भगदड़ में FM न्यूज की ब्यूरो चीफ चित्रा पटेल गंभीर रूप से घायल हो गई हैं। उन्हें सीने में माइनर फ्रैक्चर और पैर में चोट आई हैं।
0 बेकाबू भीड़ और सुरक्षा का अभाव
शराब घोटाला मामले में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जैसे ही चैतन्य बघेल जेल से बाहर आए, वहां मौजूद कांग्रेस समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ नारेबाजी शुरू कर दी। समर्थकों का हुजूम इतना बेकाबू था कि उन्होंने वहां मौजूद मीडियाकर्मियों की सुरक्षा की कोई परवाह नहीं की। इसी आपाधापी में पत्रकार चित्रा पटेल भीड़ के बीच घिर गईं और जेल के भारी गेट के पास दब गईं।
0 उपकरण टूटे, पत्रकार हुईं लहूलुहान
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ का धक्का इतना जबरदस्त था कि चित्रा पटेल जमीन पर गिर गईं। इस दौरान उनका मोबाइल और प्रेस आईडी कार्ड टूट गया और माइक भी किसी ने छीन लिया। शारीरिक चोटों के साथ-साथ उनके कीमती पेशेवर उपकरणों का भी नुकसान हुआ है। बताया जा रहा है कि एक अन्य पत्रकार का मोबाइल रिसीवर भी इस भीड़ में गायब हो गया।
0 लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार
एक महिला पत्रकार के साथ ऐसी घटना राजनीतिक दलों के अनुशासन पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। कवरेज के दौरान पत्रकारों के साथ संवेदनशीलता बरतने के बजाय, कार्यकर्ताओं का यह आक्रामक व्यवहार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का अपमान है।
0 सवालिया निशान: कौन लेगा जिम्मेदारी?
राजनीतिक रैलियों और जेल के बाहर होने वाले ऐसे जमावड़ों में अक्सर पत्रकार भीड़ का निशाना बनते हैं। चित्रा पटेल को आई चोटें,यह दर्शाती है कि स्थिति कितनी जानलेवा हो सकती थी। क्या कांग्रेस पार्टी और स्थानीय प्रशासन पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहा है?
> नोट: किसी भी पत्रकार के साथ, विशेषकर फील्ड में तैनात महिला पत्रकारों के साथ ऐसी घटना न केवल शारीरिक चोट है, बल्कि उनकी अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने जैसा है।
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