




0 व्यासपीठ पर विराजित शास्त्री नरेश भाई राज्यगुरु ने बताया कृष्ण जन्म का भावार्थ
0 मजीठिया परिवार का आयोजन,नागपुर के कपिल महाराज कर रहे मंडल पूजन
0 छप्पन भोग में सजे थाल और भजनों की मची खूब धमाल
TTN डेस्क
कोयंबटूर : मजीठिया परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ में 30 नवंबर, रविवार को श्री कृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। कथा स्थल श्री गुजराती समाज में पूरा माहौल भक्ति और उल्लास से सराबोर हो गया।
यह आयोजन प्रकाश भाई एवं मनोहर भाई मजीठिया परिवार द्वारा अपने पिताश्री स्व मूलजी लक्ष्मीदास मजीठिया एवं माताश्री स्व चंपा बेन मूलजी मजीठिया के मोक्षार्थ एवं धर्म,आत्म कल्याणार्थ किया गया है।
0 धर्म और प्रेम की स्थापना का प्रतीक है कृष्ण जन्म : राज्यगुरु
शास्त्री नरेश भाई राज्यगुरु जी ने व्यासपीठ से भगवान श्री कृष्ण के जन्म और उनकी बाल लीलाओं का अलौकिक वर्णन किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कृष्ण जन्म सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि संसार में धर्म और प्रेम की स्थापना का प्रतीक है। गुरुजी के मुखारविंद से ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की अमृत वर्षा हुई, जिसने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
0 मंडलपूजा करा रहे है नागपुर के पंडित कपिल दवे
इस भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के दौरान मंडल पूजन का कार्य पूर्ण वैदिक विधि विधान से पंडित कपिल दवे महाराज,नागपुर करवा रहे है।साथ ही भागवत पोथी पूजन के कार्य में भी उनका सक्रिय योगदान है।
0 बाल कृष्ण की झांकी और रास-भजन उत्सव
जैसे ही कृष्ण जन्म की घोषणा हुई, पूरा पंडाल जय कन्हैया लाल की के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने कृष्ण रूप धरे बालक को अपने हाथों पर उठा लिया । वहीं सुंदर झांकी में नन्हे बाल गोपाल को पालने में झुलाया गया। इस अवसर पर मजीठिया परिवार के सदस्यों और कथा में उपस्थित भक्तों ने उत्साह के साथ पारंपरिक रास और भजन उत्सव का आयोजन किया। ढोल की थाप और मधुर भजनों की धुन पर भक्तगण भाव-विभोर होकर नाचते रहे, जिससे मानो पूरा समाज कृष्णमय हो गया।हरि गुण भजन को बहुत ही सुरीले रूप में हरेश भाई राज्यगुरु और उनकी टीम ने प्रस्तुत किया,जिससे सभी भक्तिधारा में तल्लीन हो गए।
उत्सव के दौरान आरती हुई और पंचामृत,प्रसाद का वितरण किया गया। मनोरथी परिवार ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया और आगे के कार्यक्रमों में सम्मिलित होने का आग्रह किया।
> अगले कार्यक्रम: 2 दिसंबर को रुक्मिणी विवाह होगा।भागवत कथा का समापन 04 दिसंबर, गुरुवार को सुबह 9 बजे पूर्णाहुति (हवन) और दोपहर 12 बजे से महाप्रसाद के साथ होगा।
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