
TTN डेस्क
कोरबा,21 सितंबर : महान संत और दिव्य कथावाचक पूज्य जगतगुरु रामभद्राचार्य जी महाराज का कोरबा में भव्य स्वागत किया गया। वे 22 से 30 सितंबर तक भवानी मंदिर परिसर में नवनिर्मित मानस मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा और लोकार्पण समारोह के लिए यहां पहुंचे हैं। इस मानस मंदिर में माता कौशल्या की गोद में शिशु रूप में प्रभु श्री राम विराजमान हैं।
चित्रकूट से चलकर कोरबा पहुंचे रामभद्राचार्य जी का भवानी मंदिर में आरती उतारकर और पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया गया।
0 भव्य रैली और रामकथा का शुभारंभ
22 सितंबर को सुबह 11 बजे, मां सर्वमंगला मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद एक विशाल कार और बाइक रैली निकाली जाएगी। यह रैली पावर हाउस रोड, टीपीनगर चौक, सीएसईबी चौक होते हुए कोहड़िया से भवानी मंदिर पहुंचेगी। इसी दिन, शाम 3 बजे से 7 बजे तक दिव्य रामकथा का शुभारंभ होगा, जहां पहले दिन श्री राम कथा की महिमा का वर्णन किया जाएगा।
0 नौ दिवसीय कथा का विस्तृत कार्यक्रम
जगतगुरु रामभद्राचार्य जी अपने नौ दिवसीय प्रवास के दौरान विभिन्न प्रसंगों पर कथा सुनाएंगे:
* 22 सितंबर (सोमवार): श्री राम कथा की महिमा
* 23 सितंबर (मंगलवार): भगवान शिव के विवाह की कथा
* 24 सितंबर (बुधवार): भगवान श्री राम जन्मोत्सव की कथा
* 25 सितंबर (गुरुवार): प्रभु श्री राम जी की बाल लीलाओं की कथा
* 26 सितंबर (शुक्रवार): माता सीता और श्री राम के विवाह की कथा
* 27 सितंबर (शनिवार): श्री राम और केवट का प्रसंग
* 28 सितंबर (रविवार): श्री राम-भरत मिलाप की कथा
* 29 सितंबर (सोमवार): श्री राम और सबरी की कथा
* 30 सितंबर (मंगलवार): श्री राम का राज्याभिषेक और कथा का विश्राम
0 पद्मविभूषण जगतगुरु रामभद्राचार्य जी का परिचय
रामभद्राचार्य जी अपनी दिव्य दृष्टि और गहन ज्ञान के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने बचपन से ही आंखों की ज्योति न होने के बावजूद अपनी साधना से न केवल सभी धर्मग्रंथों का अध्ययन किया, बल्कि कई ग्रंथों की रचना भी की। राम जन्मभूमि विवाद के दौरान सर्वोच्च न्यायालय में उन्होंने ग्रंथों में वर्णित प्रमाण प्रस्तुत कर सबको अचंभित कर दिया था।
0 दो महीने की उम्र में ही आंखे चली गई मगर…
जगद्गुरु रामभद्राचार्य, जन्म १४ जनवरी १९५०, एक प्रसिद्ध हिंदू धार्मिक नेता, विद्वान, बहुभाषाविद् और कवि हैं, जिनका वास्तविक नाम गिरिधर मिश्रा है. 2 महीने की उम्र में आँखों की रोशनी खोने के बावजूद, उन्होंने ८० से अधिक ग्रंथ लिखे और २२ भाषाएं बोल सकते हैं. वह तुलसी पीठ के संस्थापक और रामानन्द संप्रदाय के वर्तमान जगद्गुरु हैं, और उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया है.
यह पूरा आयोजन माँ भवानी मंदिर श्री राम कथा आयोजन समिति, कोरबा और आदित्य वाहिनी के जिलाध्यक्ष संदीप शर्मा द्वारा किया जा रहा है। सभी श्रद्धालुजन कार्यक्रम स्थल, माँ भवानी मंदिर, दर्री डेम के पावन परिसर पर नवनिर्मित मानस मंदिर प्रांगण में आकर कथा श्रवण का लाभ उठा सकते हैं।


