जयपुर सेंट्रल जेल से दो कैदियों की सनसनीखेज फरारी: सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

TTN डेस्क

जयपुर की हाई सिक्योरिटी सेंट्रल जेल से 20 सितंबर 2025 को शनिवार तड़के सुबह करीब 3:30 बजे दो कैदी दीवार फांदकर फरार हो गए। यह घटना जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा देने वाली है। फरार कैदियों की पहचान नवल किशोर महावर (मालपुरा गेट थाने से) और अनस कुमार उर्फ दानिश (सांगानेर थाने से) के रूप में हुई है। दोनों चोरी के मामलों में बंद थे और हाल ही में जेल पहुंचे थे—अनस 15 सितंबर को और नवल किशोर 17 सितंबर को। दोनों बैरक नंबर 13 में बंद थे, जहां कुल 130 कैदी थे।

कैदियों ने रात के अंधेरे का फायदा उठाकर पहले बैरक की खिड़की की जाली (रोशनदान) को सरिया या किसी धातु के औजार से काटा। इसके बाद वे जेल परिसर में घुस आए और करीब डेढ़ से दो घंटे तक रास्ता तलाशते घूमते रहे। इस दौरान वे तीन लेयर की बैरिकेडिंग पार कर गए, मुलाकात कक्ष तक पहुंचे, और आश्चर्यजनक रूप से महिला कैदियों के बैरक के पास भी पहुंचे। यहां उन्होंने कंबल का सहारा लेकर भागने का पहला प्रयास किया, लेकिन कंबल फट जाने से यह नाकाम रहा। अंततः उन्होंने जेल के गार्डन में लगे प्लास्टिक के पानी के ग्रीन पाइप का इस्तेमाल किया। पाइप को दीवार पर फेंककर वे 25-27 फीट ऊंची दीवार पर चढ़े, हाई टेंशन करंट वाले तारों को लकड़ी या पाइप से पार किया, और नीचे कूद पड़े। कूदते समय अनस को सिर और आंख में चोट लगी।

सुबह 5:30 बजे रोल कॉल के दौरान जेल प्रशासन को फरारी का पता चला। सर्च के बाद 6 बजे पुलिस को सूचना दी गई। जेल में कुल 2100 से अधिक कैदी-बंदी हैं, और उस रात 18 जेल प्रहरी ड्यूटी पर थे, लेकिन किसी ने भी शोर या हलचल नहीं सुनी।

0 कैदियों की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई

फरारी की खबर फैलते ही जयपुर पुलिस ने शहरभर में नाकाबंदी कर दी और कई टीमें गठित कीं। सीसीटीवी फुटेज और मुखबिरों की मदद से अनस को 11 घंटे बाद (20 सितंबर शाम तक) गिरफ्तार कर लिया गया। नवल किशोर को 21 सितंबर सुबह प्रताप नगर के बड़ का बास इलाके से पकड़ा गया। दोनों को दोबारा जेल भेज दिया गया है, और उन पर फरार होने के अतिरिक्त मामला दर्ज किया गया। पुलिस का कहना है कि दोनों ने पहले से ही साजिश रच रखी थी, लेकिन औजार कहां से मिला, इसकी जांच जारी है।

0 जेल प्रशासन पर कार्रवाई: 11 कर्मचारी निलंबित

घटना के बाद जेल महकमे में बड़ी कार्रवाई हुई। डिप्टी जेलर राम चरण मीणा, दो मुख्य प्रहरी, पांच प्रहरी और तीन आरएएसी जवान सहित कुल 11 कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया। जेल डीजी के निर्देश पर डीआईजी जेल सुमन की अगुवाई में जांच कमेटी गठित की गई है। प्रारंभिक जांच में लापरवाही उजागर हुई है—प्रहरी सोते रहे, सीसीटीवी तोड़ दिया गया था, और कोई अलर्ट नहीं हुआ। जेल में सीसीटीवी फुटेज की भी जांच चल रही है।

0 सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल: क्या है कमियां?

यह जयपुर सेंट्रल जेल की हाई सिक्योरिटी होने के बावजूद पहली ऐसी बड़ी फरारी मानी जा रही है, जहां कैदी इतने आसानी से बाहर निकल गए। जेल में तीन लेयर बैरिकेडिंग, करंट वाले तार और 18 प्रहरी होने के बावजूद कैदी दो घंटे घूमते रहे, महिला बैरक तक पहुंचे, लेकिन किसी ने हिम्मत नहीं दिखाई। विशेषज्ञों का कहना है कि जेलों में मोबाइल फोन, औजारों की तस्करी और प्रहरीयों की लापरवाही आम समस्या है। इस जेल से पहले भी विवाद हुए हैं—मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को दो बार फोन पर धमकी मिली, और एक कैदी ने इंस्टाग्राम पर रील पोस्ट की थी। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को भी यहीं रखा गया था, जहां से उसका इंटरव्यू लीक हुआ था। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है, जबकि प्रशासन ने वादा किया है कि ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।

यह घटना न केवल जेल व्यवस्था की पोल खोलती है, बल्कि राजस्थान की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है। जांच पूरी होने के बाद और खुलासे हो सकते हैं।