देखें तस्वीरें…सेंट मैरी पर्व 2025 : जन्मोत्सव रैली में उमड़ा जनसैलाब

00 बेंगलुरु की ऐतिहासिक सेंट मैरी बेसिलिका, शिवाजीनगर में 8 सितंबर 2025 को सेंट मेरी पर्व (नटिविटी ऑफ द बेस्ड वर्जिन मैरी) भव्य उत्साह के साथ मनाया गया। यह वार्षिक उत्सव शहर में धार्मिक व सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।

00 यह शोभायात्रा शिवाजी नगर में हुई और इसमें आकर्षक रोशनी और सजावट वाला रथ था, जिस पर मदर मरियम की 6 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित थी.जिसे रेशमी साड़ी से सुसज्जित किया ज्ञात।रथ की ऊंचाई करीब 55 फुट थी।

TTN डेस्क

इस वर्ष 2025 को विशेष जूबिली ईयर के रूप में मनाया गया, जिसमें कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की उपस्थिति ने समारोह को और विशेष बना दिया। लाखों भक्तों, जिसमें ईसाई, हिंदू, मुस्लिम और अन्य समुदाय शामिल थे, ने इस पर्व में हिस्सा लिया।

0 29 अगस्त को हुई पर्व की शुरुआत

पर्व की शुरुआत 29 अगस्त को ध्वज फहराने के साथ हुई, जिसका आशीर्वाद बैंगलोर के आर्कबिशप डॉ. पीटर माचाडो और सहायक बिशप जोसेफ सुसैनाथन ने किया। शिवाजीनगर विधायक रिजवान अरशद मुख्य अतिथि थे। इस दौरान 2026 का बेसिलिका कैलेंडर भी जारी हुआ।

0 सोमवार को हुआ मुख्य समारोह,निकली शोभायात्रा

नौ दिनों की नोवेना के बाद, मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज शामिल हुए। आर्कबिशप माचाडो ने माता मैरी के भव्य रथ का आशीर्वाद दिया, जिसका उद्घाटन सीएम सिद्धारमैया ने किया। रथ यात्रा शिवाजीनगर की प्रमुख सड़कों—एमके स्ट्रीट, शिवाजी रोड, ब्रॉडवे रोड, रसेल मार्केट और नोरोन्हा रोड—से गुजरी। सीएम सिद्धारमैया ने इस अवसर पर सामुदायिक एकता और शांति का संदेश दिया।

0 5 लाख से अधिक लोग उमड़े,धर्म जाति का भेद नहीं

रैली में लगभग 5 लाख भक्तों ने उत्सव में हिस्सा लिया। विभिन्न भाषाओं में प्रार्थनाएं और मास आयोजित हुए, जिसमें भक्तों ने स्वास्थ्य, शांति और कृपा की प्रार्थना की।खास बात यह रही कि न केवल ईसाई वरन् विभिन्न धर्म, जाति,समुदाय के लोग आस्था के साथ रैली में शामिल हुए।हर दिशा में हाथ में जलती मोमबत्तियां किए श्रद्धालु नजर आए।

0 सेंट मैरी बेसिलिका का संक्षिप्त इतिहास

सेंट मैरी बेसिलिका बेंगलुरु की सबसे पुरानी चर्च है, जिसकी स्थापना 1685 में हुई। इसका पुनर्निर्माण 1882 में गॉथिक शैली में किया गया। 1973 में इसे कर्नाटक की पहली माइनर बेसिलिका का दर्जा मिला। माता मैरी की मूर्ति को चमत्कारिक माना जाता है, और पर्व के दौरान इसे भारतीय साड़ी पहनाई जाती है। यह चर्च सभी धर्मों के लिए आस्था और एकता का केंद्र है।