00 बिहार में मतदाता सूची विवाद और राजनीतिक रणनीति
TTN Desk



विपक्ष, विशेष रूप से INDIA गठबंधन, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। यह कदम बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और ‘वोट चोरी’ के आरोपों के बीच उठाया जा रहा है। विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस, ने चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में हेरफेर और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया है।
सूत्रों के अनुसार, 18 अगस्त 2025 को संसद में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में विपक्षी नेताओं की बैठक हुई, जिसमें इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। विपक्ष का दावा है कि CEC ने उनकी शिकायतों का समाधान नहीं किया और उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए जवाबों से असंतुष्ट हैं, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी से हलफनामा देने या माफी मांगने को कहा था।
महाभियोग प्रस्ताव के लिए संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो विपक्ष के पास नहीं है। फिर भी, INDIA गठबंधन के अलावा बीजू जनता दल (BJD), भारत राष्ट्र समिति (BRS), और YSR कांग्रेस पार्टी जैसे दलों का समर्थन लेने की कोशिश की जा रही है। यह प्रस्ताव शीतकालीन सत्र में लाया जा सकता है, क्योंकि मानसून सत्र 21 अगस्त को समाप्त हो रहा है।
हालांकि, अभी तक कोई औपचारिक प्रस्ताव दाखिल नहीं हुआ है, और यह कदम राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास माना जा रहा है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज के समान है, जिसमें दुर्व्यवहार या अक्षमता के आधार पर विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना होता है।


