
00 बढ़ते मोटापे और बीमारियों के बीच पारंपरिक भारतीय स्नैक्स भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों के निशाने पर; अनियंत्रित सेवन से हो सकते हैं गंभीर परिणाम
TTN Desk
भारत में स्ट्रीट फूड और स्नैक्स का एक अभिन्न हिस्सा माने जाने वाले समोसा और जलेबी, अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पोषणविदों के रडार पर आ गए हैं। जिस तरह पश्चिमी देशों में बर्गर और फ्राइज़ पर स्वास्थ्य चेतावनियां जारी की जाती हैं, उसी तरह अब इन लोकप्रिय भारतीय व्यंजनों के अत्यधिक सेवन पर भी चिंता व्यक्त की जा रही है। इसका मुख्य कारण इनमें मौजूद उच्च कैलोरी, संतृप्त वसा , ट्रांस फैट और चीनी की मात्रा है, जो लगातार बढ़ रहे मोटापे, मधुमेह और हृदय रोगों के मामलों में योगदान दे रही है।
0 समोसा: वसा और कैलोरी का गढ़
एक औसत समोसा, जिसे मैदा से बनी परत और आलू-मटर के मसाले से तैयार किया जाता है, फिर डीप फ्राई किया जाता है, कैलोरी और वसा का एक पॉवरहाउस होता है।
* उच्च कैलोरी: एक समोसे में औसतन 250-300 कैलोरी हो सकती है, जो एक छोटे भोजन के बराबर है।
* अस्वस्थ वसा: इसे तलने के लिए इस्तेमाल होने वाला तेल अक्सर बार-बार गर्म किया जाता है, जिससे इसमें ट्रांस फैट और हानिकारक फैटी एसिड बनते हैं। ये खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को बढ़ाते हैं और हृदय रोग का खतरा बढ़ाते हैं।
* परिष्कृत आटा (मैदा): समोसे की बाहरी परत मैदा से बनती है, जिसमें फाइबर और पोषक तत्वों की कमी होती है। यह रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) को तेजी से बढ़ाता है।
* नमक की मात्रा: मसाले में मौजूद अधिक नमक उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) का कारण बन सकता है।
0 जलेबी: चीनी का सीधा शॉट
जलेबी, जो मैदा और चीनी की चाशनी में डुबोकर बनाई जाती है, चीनी का एक सीधा और केंद्रित स्रोत है।
* अत्यधिक चीनी: एक मध्यम आकार की जलेबी में लगभग 15-20 ग्राम चीनी हो सकती है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अनुशंसित दैनिक चीनी सेवन की अधिकांश मात्रा को पूरा कर देती है। अत्यधिक चीनी का सेवन वजन बढ़ाता है, टाइप 2 मधुमेह का खतरा बढ़ाता है और दांतों को नुकसान पहुंचाता है।
* रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट: मैदा से बनी होने के कारण इसमें भी पोषण मूल्य कम होता है और यह रक्त शर्करा को तेजी से बढ़ाती है।
* डीप फ्राइंग: इसे भी तेल में तला जाता है, जिससे इसमें अस्वस्थ वसा का अंश जुड़ जाता है।
0 समोसा जलेबी क्यों बन रही है चिंता का विषय?
भारत में जीवनशैली में बदलाव, शारीरिक गतिविधि की कमी और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की बढ़ती खपत के कारण मोटापा और गैर-संक्रामक रोगों (NCDs) का बोझ लगातार बढ़ रहा है। समोसा और जलेबी जैसे व्यंजन, जो अक्सर शाम के नाश्ते या उत्सवों में अनियंत्रित रूप से खाए जाते हैं, इस समस्या को और गंभीर बनाते हैं।
0 विशेषज्ञों की सलाह:
स्वास्थ्य विशेषज्ञ समोसा और जलेबी जैसे डीप-फ्राई और मीठे व्यंजनों का सेवन कम करने की सलाह देते हैं।
* संयम महत्वपूर्ण: इनका सेवन कभी-कभार और कम मात्रा में ही करना चाहिए, न कि नियमित आहार के हिस्से के रूप में।
* स्वस्थ विकल्प: स्नैक्स के लिए फल, नट्स, भुने चने, सलाद या घर पर बने स्वस्थ विकल्पों को प्राथमिकता दें।
* खाना पकाने के तरीके: यदि घर पर बना रहे हैं, तो एयर-फ्राइंग या बेकिंग जैसे स्वस्थ तरीकों पर विचार करें और कम तेल का उपयोग करें।
* जागरूकता: लोगों को इन खाद्य पदार्थों के पोषण मूल्य और स्वास्थ्य पर उनके संभावित प्रभावों के बारे में शिक्षित करना महत्वपूर्ण है।
0 पारंपरिक व्यंजन के स्वस्थ विकल्प पर अब फोकस
सरकार और स्वास्थ्य संगठन भी अब पारंपरिक व्यंजनों के स्वस्थ विकल्पों को बढ़ावा देने और खाद्य पदार्थों में वसा, चीनी और नमक की मात्रा को कम करने के लिए नीतियां बनाने पर विचार कर रहे हैं। समोसा और जलेबी जैसी चीजें बेशक हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के साथ, अब इनके सेवन में भी संयम बरतने का समय आ गया है।


