सुप्रीम सुनवाई : बिलों को मंजूरी देने का संवैधानिक अधिकार राज्यपाल को,अदालत को नहीं : बीजेपी की राज्य सरकारों ने कहा

00सुप्रीम कोर्ट में राज्यपालों के बिलों पर सुनवाई: क्या अदालतें तय कर सकती हैं समय-सीमा?

TTN Desk

​नई दिल्ली: मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति और राज्यपालों द्वारा बिलों पर हस्ताक्षर के लिए समय-सीमा तय करने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान महाराष्ट्र, गोवा, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पुडुचेरी जैसे भाजपा शासित राज्यों के वकीलों ने तर्क दिया कि बिलों को मंजूरी देने का अधिकार अदालतों के दायरे में नहीं आता।
​संविधान पीठ ने की सुनवाई
​मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पाँच-सदस्यीय संविधान पीठ इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई कर रही है। यह याचिका इस बात पर केंद्रित है कि क्या संविधान में राज्यपालों के लिए बिलों को मंजूरी देने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित की जा सकती है।

भाजपा शासित ​राज्यों का तर्क: यह एक संवैधानिक अधिकार है

​महाराष्ट्र की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा, “बिलों पर मंजूरी देने का अधिकार सिर्फ राज्यपाल या राष्ट्रपति को है।” उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि संविधान में ‘डीम्ड एसेंट’ (Deemed Assent) जैसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिसका अर्थ यह है कि अगर किसी बिल पर मंजूरी नहीं मिली है तो उसे स्वतः पास मान लिया जाए।
​उत्तर प्रदेश और ओडिशा की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने भी इसी बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और राज्यपालों को बिलों पर मंजूरी देने से पहले पूरी तरह से स्वायत्तता और विवेक का अधिकार है। उन्होंने तर्क दिया कि अदालतें इस प्रक्रिया के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं कर सकतीं।

0 ​विपक्ष की चिंताएँ

​यह मामला तब सामने आया जब कई विपक्षी शासित राज्यों ने आरोप लगाया कि उनके राज्यपाल जानबूझकर बिलों को रोककर रखते हैं, जिससे राज्य सरकारों के कामकाज में बाधा आती है। उनका मानना है कि इस तरह की देरी से राज्यों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित होती है। हालांकि, सत्तारूढ़ भाजपा का कहना है कि राज्यपाल संवैधानिक पदों पर हैं और वे अपने विवेक से ही निर्णय लेते हैं।

0संविधान पीठ के फैसले पर नजर

​यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संविधान पीठ इस मामले में क्या फैसला सुनाती है और क्या यह भविष्य में राज्यपालों और राज्य सरकारों के बीच के संबंधों को फिर से परिभाषित करेगा।