संकेत “सूरज” उदय का : कभी गोद में खिलाया था, अब दिग्गी राजा ने रखा कंधे पर हाथ


0 सियासत की बदलती पीढ़ी की है ये तस्वीर

✍🏼 मनोज यू शर्मा

राजनीति में रिश्ते केवल समीकरणों से नहीं, बल्कि दशकों के भरोसे और पारिवारिक आत्मीयता से बनते हैं। बीते बुधवार को रायपुर में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जिसने छत्तीसगढ़ की भावी राजनीति और कांग्रेस के भीतर की गहरी जड़ों की एक भावुक तस्वीर पेश की। अवसर था मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के चाणक्य कहे जाने वाले दिग्विजय सिंह का रायपुर प्रवास, जहाँ वे नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के निवास पहुंचे।

0 यादों का ‘पुनर्मिलन’ और दिग्गजों का जमावड़ा

महंत निवास पर आयोजित यह मिलन किसी राजनीतिक बैठक से कहीं अधिक एक ‘फैमिली रीयूनियन’ जैसा नजर आया। अविभाजित मध्य प्रदेश के दौर से साथ चले इन नेताओं के चेहरों पर पुरानी यादों की चमक साफ दिखी। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंहदेव और पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल समेत कांग्रेस की अग्रिम पंक्ति के लगभग सभी बड़े चेहरे मौजूद थे। यह जुटान संदेश था कि चुनावी हार-जीत अपनी जगह है, लेकिन आपसी रिश्तों की गर्माहट आज भी कायम है।

0 वक्त का चक्र: गोद से कंधे तक का सफर

इस मुलाकात की सबसे चर्चित तस्वीर सूरज महंत और दिग्विजय सिंह की रही। यादें ताजा करते हुए चर्चा चली कि जब दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे और महंत जी उनके मंत्रिमंडल में गृह मंत्री, तब नन्हे सूरज को दिग्विजय अपनी गोद में खिलाया करते थे।
आज वक्त का पहिया घूम चुका है। वही बालक अब एक आत्मविश्वास से भरे युवा के रूप में सामने खड़ा था। दिग्विजय सिंह ने न केवल सूरज को अपने पास बैठाया, बल्कि उनके कंधे पर हाथ रखकर काफी देर तक मंत्रणा की। राजनीति के जानकारों के लिए यह महज एक तस्वीर नहीं, बल्कि विरासत के हस्तांतरण और एक युवा नेतृत्व को ‘आशीर्वाद’ देने जैसा संकेत है।

0 क्या ‘सूरज’ के उदय की तैयारी है?

काफी समय से सियासी गलियारों में यह चर्चा आम है कि महंत परिवार की तीसरी पीढ़ी यानी सूरज महंत जल्द ही सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि वे कोरबा या सक्ती जैसे अपने पारिवारिक गढ़ से अपनी चुनावी पारी की शुरुआत कर सकते हैं। हालांकि डॉ. महंत और सांसद ज्योत्सना महंत अभी सूरज के ‘सीखने और अनुभव लेने’ की बात कहते हैं, लेकिन दिग्विजय सिंह के साथ उनकी यह करीबी चर्चा बताती है कि ‘पॉलिटिकल ग्रूमिंग’ (राजनीतिक निखार) का दौर शुरू हो चुका है।

0 राजनीति का मंत्र और भविष्य

कहा जा रहा है कि दिग्विजय सिंह ने सूरज के कंधे पर हाथ रखकर उन्हें राजनीति के वो ‘गुर’ दिए हैं, जो किताबों में नहीं मिलते। छत्तीसगढ़ की राजनीति में अब नए चेहरों का उभार शुरू हो चुका है। ऐसे में सूरज महंत का राजनीति में आना तो तय माना जा रहा है, बस इंतज़ार इस बात का है कि वे अपनी पारी का आगाज़ ‘कब और कहाँ’ से करते हैं।