रायपुर में हुआ साहित्यकारों का महाकुंभ,विभिन्न विधाओं की प्रस्तुति को मिली सराहना

00 कोरबा की कवियत्री फिरोजा खान को मिला “काव्य श्री” सम्मान,अन्य प्रतिभाओं का भी हुआ सम्मान

TTN Desk

​रायपुर, छत्तीसगढ़ – साहित्य और कला प्रेमियों के लिए रविवार का दिन बेहद खास रहा, जब सिविल लाइंस स्थित वृंदावन हॉल में साहित्य सृजन संस्थान का चौथा वार्षिक समारोह धूमधाम से संपन्न हुआ। सुबह से देर शाम तक चले इस साहित्यिक उत्सव में प्रदेश भर के साहित्यकार और कला प्रेमी शामिल हुए, जिसने इसे एक यादगार कार्यक्रम बना दिया।

0 ​विविध साहित्यिक विधाओं का अनूठा संगम

​यह समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि साहित्यिक विधाओं का अनूठा संगम था, जिसमें काव्य पाठ, पुस्तक विमोचन और सम्मान समारोह जैसे महत्वपूर्ण चरण शामिल थे। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10 बजे हुई और यह देर शाम 5 बजे तक चला।

0 ​पुस्तक विमोचन और समीक्षा

​समारोह का मुख्य आकर्षण नवोदित और स्थापित साहित्यकारों की नई कृतियों का विमोचन रहा:

​ममता खरे ‘मधु’ का गजल संग्रह

​वंदना ठाकुर का संस्मरण और भजन संग्रह

​धनेश्वरी गुल की नई पुस्तक

​इन पुस्तकों पर सुप्रसिद्ध गजलकार सुदेश मेहर और राजकुमार धर द्विवेदी ने विस्तार से समीक्षा की।

0 ​हृदयस्पर्शी काव्य-पाठ

​काव्य-पाठ ने श्रोताओं का मन मोह लिया। भिलाई की सुप्रसिद्ध कवयित्री संतोष झांझी ने अपने गीतों से सभी का दिल छू लिया, जिससे पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। उनके अलावा, शशि सुरेंद्र दुबे, डॉ. अभिलाषा बेहार, डॉ. लक्ष्मीकांत पंडा, फिरोजा खान (कोरबा) और विजय ठाकुर जैसे कई प्रतिभाशाली कवि-कवयित्रियों ने भी अपनी रचनाओं का पाठ किया और खूब प्रशंसा बटोरी। कार्यक्रम का संचालन उमेश कुमार सोनी ‘नयन’ और सीमा पांडेय ‘सीमा’ ने किया।

0 ​साहित्य और कला के लिए सम्मान

​समारोह में उन विभूतियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने साहित्य और कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। भाषाविद डॉ. चित्तरंजन कर और माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियों को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान न सिर्फ उनके प्रयासों की सराहना थी, बल्कि युवा पीढ़ी को साहित्य के प्रति प्रोत्साहित करने का भी एक प्रयास था।
​इस सफल आयोजन का पूरा श्रेय संस्थान के अध्यक्ष वीर अजीत शर्मा और उनकी पूरी टीम को जाता है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ की साहित्यिक धरोहर को मजबूत करने का काम किया। इस आयोजन ने लेखकों, कवियों और पाठकों को एक मंच पर लाकर आपसी संवाद और साहित्यिक विमर्श को बढ़ावा दिया, जो यह साबित करता है कि छत्तीसगढ़ में कला और साहित्य की जड़ें बहुत गहरी हैं।