00 रायगढ़ में अजीबोगरीब मामला, कानूनी प्रक्रिया पर उठे सवाल
TTN डेस्क
रायगढ़, छत्तीसगढ़: रायगढ़ में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहाँ कलेक्टर ने एक ऐसे व्यक्ति को जिला बदर करने का आदेश जारी कर दिया, जिसकी पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। यह आदेश जारी होने के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
0 मृत्यु के बाद हुआ जिला बदर का आदेश
यह मामला श्याम गोरख नामक एक 27 वर्षीय व्यक्ति से जुड़ा है। पुलिस अधीक्षक के प्रतिवेदन के आधार पर, कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी ने 11 सितंबर को श्याम गोरख को एक साल के लिए रायगढ़ और पड़ोसी जिलों से बाहर रहने का आदेश दिया। आदेश जारी होने के कुछ ही देर बाद, पुलिस को मौखिक रूप से सूचना मिली कि श्याम गोरख का निधन हो चुका है।
0 कानूनी प्रक्रिया और खामियाँ
कलेक्टर न्यायालय के अनुसार, यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 5 (क) और (ख) के तहत की गई थी। श्याम गोरख 7 अक्टूबर 2024 को एक सुनवाई में उपस्थित हुआ था, लेकिन उसके बाद लगातार अनुपस्थित रहा। पुलिस ने 25 अगस्त 2025 को एक “फरारी पंचनामा” प्रस्तुत किया, जिसमें यह बताया गया कि श्याम गोरख 30-40 दिनों से घर पर नहीं मिल रहा है। इसी पंचनामा के आधार पर न्यायालय ने उसे जिला बदर करने का आदेश दे दिया।
0 जाँच के आदेश, पुलिस पर उठे सवाल
कलेक्टर न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि आदेश जारी करते समय उन्हें श्याम गोरख की मृत्यु के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। अब उन्होंने पुलिस को इस मामले की सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इस घटना से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि पुलिस ने फरार होने की रिपोर्ट तो दी, लेकिन मृत्यु की जानकारी न्यायालय के संज्ञान में नहीं लाई।


