

TTN डेस्क
नई दिल्ली।जेपी समूह की संपत्तियों के अधिग्रहण की रेस अब देश की सबसे बड़ी अदालत की दहलीज पर पहुंच गई है। वेदांता ग्रुप ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अडानी ग्रुप के ‘रिजॉल्यूशन प्लान’ पर रोक लगाने की मांग की है। वेदांता का दावा है कि उनकी संशोधित बोली (Revised Bid) वित्तीय रूप से अडानी समूह के मुकाबले कहीं ज्यादा बेहतर और कर्जदाताओं के हित में थी।
0 वेदांता का क्या था नया ऑफर?
शुरुआत में वेदांता ने 17,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उसमें तुरंत नकद (Upfront Cash) कम था। इसे देखते हुए वेदांता ने अपनी बोली को संशोधित किया:
* कुल ऑफर: ₹16,726 करोड़ (अडानी के ₹14,535 करोड़ के मुकाबले अधिक)।
* नकद भुगतान: ₹6,563 करोड़ तुरंत देने का वादा (अडानी के ₹6,000 करोड़ से अधिक)।
* तर्क: वेदांता का कहना है कि उनकी संशोधित बोली न केवल कुल रकम में, बल्कि तत्काल नकद भुगतान के मामले में भी अडानी ग्रुप से आगे थी, फिर भी क्रेडिटर्स की कमिटी (CoC) ने इसे अनदेखा कर दिया।
0 अडानी के पक्ष में क्यों गया फैसला?
दिवालिया प्रक्रिया (IBC) के दौरान कर्जदाताओं की समिति (CoC) ने अडानी ग्रुप के प्लान को प्राथमिकता दी। इसका मुख्य कारण यह माना जा रहा है कि अडानी ग्रुप बाकी बची हुई रकम को 2-3 साल के भीतर चुकाने का वादा कर रहा था, जबकि वेदांता ने इसके लिए 6 साल का समय मांगा था। क्रेडिटर्स ने “जल्द भुगतान” को “ज्यादा भुगतान” से ऊपर रखा।
0 अनिल अग्रवाल का ‘एक्स’ पर भावुक पोस्ट
वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि उन्हें पहले ‘हाईएस्ट बिडर’ घोषित कर लिखित जानकारी दी गई थी, लेकिन बाद में फैसला बदल दिया गया। उन्होंने भगवद गीता के संदेश का उल्लेख करते हुए संकेत दिया कि वे अपने अधिकारों और ‘वैल्यू मैक्सिमाइजेशन’ के सिद्धांत के लिए यह कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
0 अब आगे क्या?
NCLAT द्वारा अपील ठुकराए जाने के बाद अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर हैं। कानून के जानकारों का मानना है कि मामला अब इस बिंदु पर टिकेगा कि क्या CoC ने वेदांता की संशोधित बोली का मूल्यांकन सही तरीके से किया था या नहीं। 14 अप्रैल को ट्रिब्यूनल में भी इस पर अहम सुनवाई होनी है।


