
TTN डेस्क
श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए साल 2026 की शुरुआत निराशाजनक रही है। सोमवार सुबह 10:18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया PSLV-C62 मिशन तकनीकी खराबी के कारण विफल हो गया।
0 मुख्य बिंदु:
* मिशन का लक्ष्य: इस मिशन का मुख्य उद्देश्य अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-09 अन्वेषा और 14 अन्य को-पैसेंजर सैटेलाइट्स को 512 किलोमीटर की सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट (SSO) में स्थापित करना था।
* कहाँ हुई चूक: ISRO चीफ डॉ. वी. नारायणन के अनुसार, रॉकेट के पहले और दूसरे चरण (stages) सफल रहे, लेकिन तीसरे चरण (PS3) में गड़बड़ी आने के कारण रॉकेट अपने निर्धारित रास्ते से भटक गया।
* सैटेलाइट का विवरण: रॉकेट अपने साथ कुल 15 सैटेलाइट लेकर गया था:
* 7 भारतीय सैटेलाइट: इनमें हैदराबाद स्थित ‘ध्रुव स्पेस’ के 7 सैटेलाइट शामिल थे।
* 8 विदेशी सैटेलाइट: फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूके के सैटेलाइट शामिल थे।
* प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी: यह मिशन भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए बहुत महत्वपूर्ण था, क्योंकि पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी (ध्रुव स्पेस) ने PSLV मिशन में इतनी बड़ी हिस्सेदारी की थी।
0 लगातार दूसरी विफलता
यह PSLV रॉकेट की 64वीं उड़ान थी। गौरतलब है कि 8 महीने पहले, 18 मई 2025 को भी ‘PSLV-C61’ मिशन इसी तरह तीसरे स्टेज में तकनीकी खराबी के कारण फेल हो गया था।
यह मिशन न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) की निगरानी में संचालित हो रहा था, जो ISRO की कमर्शियल यूनिट है। यह अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट के लिए NSIL का 9वां कमर्शियल मिशन था।


