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बड़ी खबर: जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को उम्रकैद, हाईकोर्ट ने रायपुर की विशेष अदालत का फैसला पलटा


अदालत की सख्त टिप्पणी: साक्ष्य समान होने पर एक ही अपराध के आरोपियों के बीच नहीं हो सकता भेदभाव

TTN डेस्क

रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता रामावतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे और जेसीसीजे (JCCJ) नेता अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। माननीय न्यायालय ने रायपुर की निचली अदालत द्वारा अमित जोगी को बरी किए जाने के पुराने फैसले को रद्द कर दिया है।

0 क्या कहा हाईकोर्ट ने?

अदालत ने फैसला सुनाते हुए कानून के समानता के सिद्धांत पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा:
> “जब अभियोजन पक्ष का मामला सभी आरोपियों के खिलाफ एक समान साक्ष्यों पर आधारित हो, तो किसी एक आरोपी को बरी करना और दूसरों को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है। जब तक किसी आरोपी के पक्ष में बरी किए जाने का कोई ठोस और स्वतंत्र आधार न हो, तब तक कृत्रिम भेदभाव (Artificial Discrimination) नहीं किया जा सकता।”
>

0 23 साल पुराना मामला: क्या था घटनाक्रम?

* 4 जून 2003: राजधानी रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
* आरोपी: इस मामले में कुल 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से 2 लोग सरकारी गवाह बन गए थे।
* निचली अदालत का फैसला: 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने अमित जोगी को “संदेह का लाभ” देते हुए बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 आरोपियों को सजा सुनाई थी।
* सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट: जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट में रीओपन हुआ।

0 इन को भी मिल चुकी है सजा

इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में पहले ही 28 लोगों को दोषी पाया गया था। सजा पाने वालों में प्रमुख नाम शामिल हैं:
* याहया ढेबर (रायपुर महापौर एजाज ढेबर के भाई)
* शूटर चिमन सिंह
* तत्कालीन पुलिस अधिकारी: 2 तत्कालीन CSP और एक थाना प्रभारी भी इस साजिश में शामिल पाए गए थे।
* अन्य दोषी: अभय गोयल, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी सहित कुल 28 लोग वर्तमान में सजायाफ्ता हैं।

अमित जोगी को सजा मिलने के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला “समान साक्ष्य, समान न्याय” के सिद्धांत को और मजबूती प्रदान करेगा।