देखिए वीडीओ…गुस्सा फूटा : स्थानीय युवाओं की अनदेखी और ‘नौकरी के बदले वसूली’ के आरोपों से गरमाया गेवरा, PNC कंपनी कार्यालय का घेराव

TTN डेस्क

दीपका (कोरबा) | एसईसीएल (SECL) गेवरा माइंस में कोयला उत्खनन और ओवरबर्डन का काम कर रही पीएनसी (PNC) कंपनी एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गई है। स्थानीय भू-विस्थापितों और बेरोजगार युवाओं की उपेक्षा के विरोध में नगर पालिका दीपका के पार्षदों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर कंपनी कार्यालय का जोरदार घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी पर भर्ती के नाम पर 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की अवैध वसूली के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।

0 कार्यालय पर ‘नो वैकेंसी’ का बोर्ड, पर बाहरियों की हो रही एंट्री

कटघोरा रोड स्थित कंपनी कार्यालय के बाहर “नो वैकेंसी” का बोर्ड लटका दिया गया है, जबकि दर्जनों स्थानीय युवक-युवतियां अपना रिज्यूम लेकर घंटों कतार में खड़े रहते हैं。 दीपका नगर पालिका के कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय दलों के करीब 12 पार्षदों ने इस ‘दोहरी नीति’ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है。 पार्षदों का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर क्षेत्रीय युवाओं की जगह बाहरी व्यक्तियों को नौकरी में प्राथमिकता दी जा रही है。

0 नौकरी के नाम पर ₹50 हजार से ₹1 लाख की डिमांड!

आंदोलन के दौरान सबसे गंभीर मुद्दा अवैध वसूली का उठा। पार्षदों ने आरोप लगाया कि कंपनी में भर्ती के लिए 50,000 से लेकर 1,00,000 रुपये तक की कथित मांग की जा रही है。 नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेत्री हर्षित देवी राजपूत ने कड़े शब्दों में कहा कि क्षेत्र के बेरोजगारों में भारी नाराजगी है। उन्होंने अवैध वसूली की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है。

0 पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत, त्रिपक्षीय बैठक का आश्वासन

हंगामे की सूचना मिलते ही दीपका थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला。 पुलिस ने जनप्रतिनिधियों को आश्वस्त किया है कि जल्द ही जिला प्रशासन, कंपनी प्रबंधन और जनप्रतिनिधियों के बीच एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें भर्ती प्रक्रिया को लेकर पारदर्शी निर्णय लिया जाएगा。

0 कंपनी का पक्ष: “आरोप बेबुनियाद”

इधर, पीएनसी कंपनी के एचआर हेड अशोक राय ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है。 उनका कहना है कि दीपका स्थित कार्यालय अस्थाई है और कुछ लोग मामले को गलत ढंग से पेश कर रहे हैं。 उन्होंने दावा किया कि भविष्य में आने वाली वैकेंसी में कंपनी की गाइडलाइन के तहत स्थानीय लोगों को ही प्राथमिकता दी जाएगी。

0 बड़ा सवाल: आखिर किसके पास जा रहा वसूली का पैसा?

स्थानीय गलियारों में अब यह चर्चा आम है कि यदि नौकरी के नाम पर अवैध वसूली हो रही है, तो इसका मास्टरमाइंड कौन है? क्या इस खेल में कंपनी के भीतर के लोग शामिल हैं या फिर कोई सक्रिय बिचौलिया गिरोह बेरोजगारों की लाचारी का फायदा उठा रहा है?