
00 अभिभावकों ने स्कूल के वकील पर हमला करने की कोशिश की,छात्राओं के साथ अमानवीय व्यवहार
TTN Desk
ठाणे, महाराष्ट्र: ठाणे के एक स्कूल में नाबालिग छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न का एक शर्मनाक और घृणित मामला सामने आया है। ‘पीरियड चेक’ के नाम पर लगभग 10 नाबालिग लड़कियों के कपड़े उतरवाने का घिनौना कृत्य किया गया। इस अमानवीय अपराध के लिए स्कूल की प्रिंसिपल और एक अटेंडेंट (दोनों महिलाएं) को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया। यह घटना तब उजागर हुई, जब स्कूल के शौचालय में कथित तौर पर खून के धब्बे पाए गए, जिसके बाद स्कूल प्रशासन ने छात्राओं को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हुए उनकी गरिमा को तार-तार किया।
0 अभिभावकों का आक्रोश और वकील पर हमले की कोशिश
मंगलवार को हुई इस घटना को बच्चियों ने शाम को घर पहुंच अपने पेरेंट्स को बताया उसके बाद अभिभावकों में भारी आक्रोश फैल गया।बुधवार को बड़ी संख्या में पेरेंट्स स्कूल पहुंच गए और जम कर विरोध जताया।स्थिति तनावपूर्ण होने पर स्कूल पुलिस पहुंच गई। गुस्साए अभिभावकों ने न केवल स्कूल प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, बल्कि स्कूल की ओर से आए एक वकील पर हमला करने की कोशिश भी की। यह घटना उस समय हुई जब वकील ने स्कूल का पक्ष रखने की कोशिश की, जिसे अभिभावकों ने अपमानजनक माना। इस हमले की कोशिश ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। यह घटना समाज में व्याप्त गुस्से और स्कूल प्रशासन के प्रति अविश्वास को दर्शाती है।
0 अन्य आरोपियों पर भी शिकंजा
पुलिस ने इस मामले में चार शिक्षिकाओं और दो स्कूल ट्रस्टियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है, जिन पर इस शर्मनाक कृत्य में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने का आरोप है। यह घटना शिक्षा के मंदिर में छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है और मासिक धर्म जैसे प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया से जुड़े सामाजिक मिथकों और शर्मिंदगी को उजागर करती है। यह अक्षम्य है कि जिस संस्थान को बच्चों के भविष्य को संवारने का दायित्व सौंपा गया, वही उनकी गरिमा और मानसिक स्वास्थ्य को कुचलने का केंद्र बन गया।
0 कठोर कार्रवाई की मांग
गिरफ्तार प्रिंसिपल और अटेंडेंट को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है। इस घटना ने अभिभावकों और नागरिक समाज में जबरदस्त आक्रोश पैदा किया है। लोग दोषियों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। शिक्षा विभाग ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है और स्कूल के खिलाफ कड़े कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
0 सुरक्षा और जागरूकता की जरूरत
यह घटना स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए तत्काल और सख्त दिशानिर्देशों की आवश्यकता को रेखांकित करती है। मासिक धर्म जैसे संवेदनशील मुद्दों पर जागरूकता कार्यक्रमों और शिक्षकों के लिए उचित प्रशिक्षण की कमी इस तरह के शर्मनाक कृत्यों को बढ़ावा देती है। समाज और प्रशासन को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षा के मंदिर में बच्चों के साथ ऐसा कोई घृणित व्यवहार दोबारा न हो। दोषियों को कठोर सजा देकर एक मिसाल कायम करने की जरूरत है, ताकि कोई भी भविष्य में ऐसी हिम्मत न कर सके।


