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टैरिफ का असर : अगर अगले वित्तीय वर्ष में जारी रहा तो भारत के लिए बड़ा खतरा होगा,जीडीपी पर असर

00 जानिए भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार नागेश्वरन ने ब्लूमबर्ग इंटरव्यू में जीडीपी और टैरिफ पर और क्या कहा

TTN डेस्क

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंथा नागेश्वरन ने ब्लूमबर्ग टीवी को दिए हालिया इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ के प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि ये टैरिफ भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर इस वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2025-मार्च 2026) में 0.5% से 0.6% तक का नकारात्मक असर डाल सकते हैं, जो टैरिफ की अवधि पर निर्भर करेगा।

मुख्य बिंदु:

टैरिफ का प्रभाव: नागेश्वरन ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ एक अल्पकालिक घटना होगा।” यदि यह वित्तीय वर्ष में लंबे समय तक चले, तो जीडीपी पर 0.5% से 0.6% का असर पड़ सकता है। यदि यह अगले वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2026-मार्च 2027) में भी जारी रहा, तो प्रभाव “बड़ा” होगा और भारत के लिए “मुख्य जोखिम” (major risk) बनेगा। यह अनिश्चितता रोजगार और जीडीपी वृद्धि दोनों के लिए बड़ी चुनौती पैदा कर सकती है।

जीडीपी पूर्वानुमान: इसके बावजूद, उन्होंने सरकार के 6.3% से 6.8% जीडीपी वृद्धि के अनुमान पर कायम रहने की बात कही, क्योंकि अप्रैल-जून तिमाही में 7.8% की मजबूत वृद्धि हुई थी, जो एक वर्ष से अधिक समय में सबसे तेज थी। हाल की जीएसटी कटौती (0.2-0.3% जीडीपी बूस्ट), कम मुद्रास्फीति और मजबूत घरेलू मांग इसकी मदद करेगी।

टैरिफ का कारण: ये टैरिफ भारत के रूसी तेल आयात पर लगाए गए हैं, जिसे ट्रंप यूक्रेन युद्ध में रूस को फंडिंग करने का माध्यम मानते हैं। पिछले महीने टैरिफ को 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया गया, जो एशिया में सबसे ऊंचा है। इससे टेक्सटाइल, ज्वेलरी, फुटवियर और चमड़ा जैसे श्रम-गहन क्षेत्र प्रभावित होंगे, क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है (2024 में द्विपक्षीय व्यापार 129 अरब डॉलर)।
नागेश्वरन ने आशा जताई कि ये टैरिफ जल्द समाप्त हो जाएंगे, और भारत की घरेलू मांग मजबूत बनी रहेगी। भारत वित्तीय घाटे के 4.4% लक्ष्य को भी पूरा करने की स्थिति में है, जिसमें केंद्रीय बैंक के लाभांश और संपत्ति बिक्री से मदद मिलेगी।